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बुधवार, 11 अगस्त 2010
अभिलाषा अपार्टमेंट केस में हाईकोर्ट से स्थगन
छप्पन दुकान के पास मौजूद अभिलाषा अपार्टमेंट केस में गुरुवार को हाईकोर्ट की युगलपीठ ने स्थगन आदेश जारी किया है। एकल पीठ ने नगरनिगम को आदेश दिया था कि पार्किंग के लिए आरक्षित जगह पर बिल्डर ने गोडाउन बना दिया है। उसे 30 दिन में हटाया जाए ताकि रहवासियों को पार्किंग मिल सके। कोर्ट ने यह भी कहा था कि न तो पार्किंग की कंपाउंडिंग क। बिल्डर राजेश गादिया ने इस आदेश के जस्टिस शांतनु केमकर और जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की युगलपीठ में चुनौती दी। गादिया ने बताया कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया है।
पार्किंग की नहीं हो सकती कंपाउंडिंग
- अभिलाषा अपार्टमेंट मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला
- 30 दिन में तोड़कर रहवासियों को राहत देने के आदेश
पार्किंग में अवैध निर्माण को वैध करने के लिए अपनाए जाने वाले कंपाउंडिंग के तरीके को इंदौर हाईकोर्ट ने अवैधानिक माना है। एक बिल्डिंग से जुड़े फैसले में कोर्ट ने कहा है नगरनिगम पार्किंग की जमीन की कंपाउंडिंग नहीं की जा सकती है, क्योंकि पार्किंग रहवासियों का अधिकार है। कोर्ट ने निगम को आदेश दिया है कि वह रहवासियों को 30 दिन में पार्किंग उपलब्ध कराए।
छप्पन दुकान के पास मौजूद अभिलाषा अपार्टमेंट रहवासी संघ की याचिका पर जस्टिस एससी शर्मा ने यह अहम फैसला सुनाया। रहवासी संघ के एडवोकेट सीताराम सराफ ने बताया अभिलाषा अपार्टमेंट की तल मंजिल पर स्वीकृत नक्शे के मुताबिक कल्पतरू बिल्डर को कवर्ड पार्किंग दी जाना थी, परंतु बिल्डर ने वहां गोडाउन बना लिए। इतना ही नहीं 20 हजार रुपए फीस देकर पार्किंग की कंपाउंडिंग भी करवा ली। बाद में जब शिकायत हुई तो बिल्डर ने एमओएस की खुली जमीन पर शेड बनाकर उसे पार्किंग बता दिया। कोर्ट ने माना कि न तो पार्किंग के निर्माण की कंपाउंडिंग की जा सकती है और न ही एमओएस पर शेड बनाया जा सकता है।
3000 वर्ग फीट पर अवैध गोदाम
कोर्ट ने नगरनिगम को आदेश दिया है कि वह 30 दिन में पार्किंग का अवैध हिस्सा तोड़कर रहवासियों को पार्किंग उपलब्ध कराए। बिल्डर ने तीन हजार वर्गफीट जमीन पर गोदाम बना रखा है।
याचिकाकर्ता को लौटाएं 10 हजार रुपए
कोर्ट ने आदेश दिया है कि बिल्डर रहवासी संघ को 10 हजार रुपए लौटाए। ये राशि केस लडऩे पर खर्च हुई है। बिल्डर का नाम राजेश रंजीतमल गादिया और राजकुंवरबाई रंजीतमल गादिया है।
आप भी कर सकते हैं अपील
एडवोकेट विनय सराफ ने बताया हाईकोर्ट का यह फैसला नगरनिगम के लिए आधार बन गया है। निगम चाहे तो इसके आधार पर उन सभी पार्किंग स्थानों को आजाद करवाना जा सकता है, जिनपर कंपाउंडिंग करवाकर वाणिज्यिक उपयोग शुरू हो गया है। जिन रहवासियों की पार्किंग हड़प ली गई है, वे कोर्ट के फैसले के आधार पर अपील भी कर सकते हैं।
फैसले में इन फैसलों का हवाला
- कमिश्नर कर्नाटक हाउसिंग बोर्ड विरुद्ध सी. मुद्दैह (2007)
- केआर शेनॉय विरूद्ध उडिपी मुनसीपाल्टी (1974)
- महेंद्र बाबुराव महाडिग विरूद्ध सुभाष कृष्ण कानिटकर (2005)
- प्रियंका इस्टेट्स इंटर नेशनल लिमि. विरूद्ध स्टेट ऑफ आसाम (2010)
इनकी हो सकती कंपाउंडिंग
कवरेज- अधिकतम 15 फीसदी
एफएआर- अधिकतम 10 फीसदी
सेटबेक - ढाई फीट तक
ओपन स्पेस- अधिकतम 10 फीसदी
ऊंचाई का - 1.5 प्रतिशत
... और इसकी कभी नहीं
- बिल्डिंग का प्रयोग
- अतिरिक्त फ्लोर
- पार्किंग एरिया
- आम रास्ता
- 30 दिन में तोड़कर रहवासियों को राहत देने के आदेश
पार्किंग में अवैध निर्माण को वैध करने के लिए अपनाए जाने वाले कंपाउंडिंग के तरीके को इंदौर हाईकोर्ट ने अवैधानिक माना है। एक बिल्डिंग से जुड़े फैसले में कोर्ट ने कहा है नगरनिगम पार्किंग की जमीन की कंपाउंडिंग नहीं की जा सकती है, क्योंकि पार्किंग रहवासियों का अधिकार है। कोर्ट ने निगम को आदेश दिया है कि वह रहवासियों को 30 दिन में पार्किंग उपलब्ध कराए।
छप्पन दुकान के पास मौजूद अभिलाषा अपार्टमेंट रहवासी संघ की याचिका पर जस्टिस एससी शर्मा ने यह अहम फैसला सुनाया। रहवासी संघ के एडवोकेट सीताराम सराफ ने बताया अभिलाषा अपार्टमेंट की तल मंजिल पर स्वीकृत नक्शे के मुताबिक कल्पतरू बिल्डर को कवर्ड पार्किंग दी जाना थी, परंतु बिल्डर ने वहां गोडाउन बना लिए। इतना ही नहीं 20 हजार रुपए फीस देकर पार्किंग की कंपाउंडिंग भी करवा ली। बाद में जब शिकायत हुई तो बिल्डर ने एमओएस की खुली जमीन पर शेड बनाकर उसे पार्किंग बता दिया। कोर्ट ने माना कि न तो पार्किंग के निर्माण की कंपाउंडिंग की जा सकती है और न ही एमओएस पर शेड बनाया जा सकता है।
3000 वर्ग फीट पर अवैध गोदाम
कोर्ट ने नगरनिगम को आदेश दिया है कि वह 30 दिन में पार्किंग का अवैध हिस्सा तोड़कर रहवासियों को पार्किंग उपलब्ध कराए। बिल्डर ने तीन हजार वर्गफीट जमीन पर गोदाम बना रखा है।
याचिकाकर्ता को लौटाएं 10 हजार रुपए
कोर्ट ने आदेश दिया है कि बिल्डर रहवासी संघ को 10 हजार रुपए लौटाए। ये राशि केस लडऩे पर खर्च हुई है। बिल्डर का नाम राजेश रंजीतमल गादिया और राजकुंवरबाई रंजीतमल गादिया है।
आप भी कर सकते हैं अपील
एडवोकेट विनय सराफ ने बताया हाईकोर्ट का यह फैसला नगरनिगम के लिए आधार बन गया है। निगम चाहे तो इसके आधार पर उन सभी पार्किंग स्थानों को आजाद करवाना जा सकता है, जिनपर कंपाउंडिंग करवाकर वाणिज्यिक उपयोग शुरू हो गया है। जिन रहवासियों की पार्किंग हड़प ली गई है, वे कोर्ट के फैसले के आधार पर अपील भी कर सकते हैं।
फैसले में इन फैसलों का हवाला
- कमिश्नर कर्नाटक हाउसिंग बोर्ड विरुद्ध सी. मुद्दैह (2007)
- केआर शेनॉय विरूद्ध उडिपी मुनसीपाल्टी (1974)
- महेंद्र बाबुराव महाडिग विरूद्ध सुभाष कृष्ण कानिटकर (2005)
- प्रियंका इस्टेट्स इंटर नेशनल लिमि. विरूद्ध स्टेट ऑफ आसाम (2010)
इनकी हो सकती कंपाउंडिंग
कवरेज- अधिकतम 15 फीसदी
एफएआर- अधिकतम 10 फीसदी
सेटबेक - ढाई फीट तक
ओपन स्पेस- अधिकतम 10 फीसदी
ऊंचाई का - 1.5 प्रतिशत
... और इसकी कभी नहीं
- बिल्डिंग का प्रयोग
- अतिरिक्त फ्लोर
- पार्किंग एरिया
- आम रास्ता
News in Patrika on 4th August 2010
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