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शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

झा आयोग आज से फिर इंदौर में

नर्मदा घाटी में बने सरदार सरोवर बांध के संबंध में मप्र सरकार द्वारा विस्थापितों को दिए गए पुनर्वास पैकेज में हुए कथित भ्रष्टाचार और फर्जी रजिस्ट्री मामले के लिए गठित जस्टिस एसएस झा आयोग शुक्रवार से इंदौर में फिर से सुनवाई शुरू करेगा। एमजीरोड स्थित एलआईसी भवन के बाजू में स्थित आयोग के दफ्तर में जस्टिस झा देवास जिले के पीडि़तों से मिलेंगे। उधर, नर्मदा बचाओ आंदोलन ने जबलपुर में एक अर्जी दाखिल करके मांग की है कि झा आयोग की अंतरिम रिपोर्ट जारी की जाए, ताकि इसके आधार पर नीतिगत फैसले लिए जा सकें।

ज्ञात रहे आंदोलन की याचिका पर ही हाईकोर्ट ने झा आयोग का गठन किया है। आरोप है कि पुनर्वास पैकेज में ढाई हजार से अधिक फर्जी रजिस्ट्रयां की गई और इससे सरकार को 300 करोड़ की चपत लगी। दलालों और अफसरों के गठजोड़ ने विस्थापितों को भूमिहीन कर छोड़ा। मप्र सरकार भी मान चुकी है कि 750 से अधिक रजिस्ट्रियां फर्जी है। हर रजिस्ट्री के लिए सरकार ने साढ़े पांच लाख रुपए का भुगतान किया है।

पत्रिका: ०३ सितम्बर २०१०

शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

अफसर-दलाल ने मिलकर की फर्जी रजिस्ट्रियां

- जस्टिस झा आयोग के सामने खुली पोल

 
नर्मदा घाटी बने सरदार सरोवर बांध के संबंध में मप्र सरकार द्वारा विस्थापितों को दिए गए पुनर्वास पैकेज में हुए कथित भ्रष्टाचार और फर्जी रजिस्ट्री मामले में अफसरों और दलालों की मिली भगत उजागर हो रही है। न्यायमूर्ति एसएस झा आयोग के समक्ष आयोजित सुनवाई में दो पुनर्वास अफसरों द्वारा गरीब आदिवासियों को ठगे जाने का मामले सामने आए। फर्जीवाड़े के शिकार प्रभावितों ने बयानों और लिखित कथनों में इसकी पुष्टि की। नर्मदा बचाओ आंदोलन की एक जनहित याचिका पर सरदार सरोवर बांध प्रभावितों की फर्जी रजिस्ट्रियों और पुनर्वास स्थलों पर हुए भ्रष्टाचार की जाँच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसएस झा की अध्यक्षता में एक सदस्यी आयोग गठित किया है। आयोग 2 अगस्त से इंदौर में है।

जमीन साढ़े तीन एकड़, भुगतान पांच का
ग्राम कोठड़ा (निसरपुर) के राधेश्याम-पन्नालाल ने आयोग को बताया जब वे जमीन के बारे में पुनर्वास अधिकारी जुवानसिंह बघेल से मिले तो उन्होंने निसरपुर के शकील और अनोखी राठौर दलालों के पास भेज दिया। दलालों ने उनसे 2 लाख रूपए वसूले और फर्जी रजिस्ट्री पकड़ा दी। रजिस्ट्री साढ़े तीन एकड़ की है, लेकिन बघेल ने भुगतान पूरे पांच एकड़ का कर दिया। मलवाड़ी (निसरपुर) के रतनसिंह-रूखडिय़ा ने फर्जीवाड़े में पुनर्वास अधिकारी बघेल के साथ पुनर्वास कार्यालय के बाबू चैतराम पाठक को भी शामिल बताया।

साढ़े पांच लाख के बजाए 40 हजार पकड़ाए
ग्राम खापरखेड़ा (कड़माल) के  मुकेश राधेश्याम ने बताया शकील और अनोखी दलाल उन्हें पुनर्वास कार्यालय कुक्षी में मिले। वहीं पुनर्वास अधिकारी  बघेल और आरके माहेश्वरी से बात कर बताया कि वे जमीन दिलवा देंगे। फर्जी रजिस्ट्री के बाद अफसर ने मुकेश के मुआवजे का चेक भी दलालों को ही दे दिया। दलालों ने मुकेश से 1.35 लाख वसूले। खापरखेड़ा के ही बुदन-सात्या ने बताया शकील और अनोखी दलाल ने उसका मुआवजा पुनर्वास कार्यालय से मिलकर निकाला तथा उन्हें मात्र 40 हजार दिए जबकि प्रति प्रभावित साढ़े पाँच लाख का भुगतान किया जाता है। 

षडयंत्र में पटवारी तक शामिल
ग्राम चिखल्दा के  शफी मोहम्मद पीरबक्ष ने बताया वे दलाल शकील और अनोखी तथा पीपरी (बागली) के पटवारी मेहताबसिंह भार्गव के षडयंत्र के शिकार हुए हैं। दलालों ने उनके दो पुत्रों की फर्जी रजिस्ट्री करवाकर उनसे ढाई लाख लूटे। ग्राम मलवाड़ी (निसरपुर) के राजकुमार गोमा और रतनसिंह रूखडिय़ा तथा निसरपुर के जगदीश औंकार ने दलालों के रूप में नारायण-रतनसिंह (भीलसुर) और खेतिया अमरा (मलवाड़ी) का नाम लिया। धरमराय के दीपक पन्नालाल ने लक्ष्मण दलाल (नवादपुरा) और निसरपुर के रूखडिय़ा-मुरार ने शकील एवं अनोखी का नाम बताया। 

News in Patrika on 13th August 2010

बुधवार, 11 अगस्त 2010

मुझे मालूम ही नहीं और मेरी जमीन बेच दी

- बुजुर्ग आदिवासी को नौजवान बताकर किसी ओर ने नाम कर दी रजिस्ट्री
- फर्जी रजिस्ट्री मामले में जस्टिस झा आयोग की सुनवाई जारी



साहब, मेरे पास चार बीघा जमीन थी, जिस पर किसी ओर ने कब्जा कर लिया है। वह कहता है जमीन की रजिस्ट्री मेरे नाम है। मुझे तो मालूम ही नहीं कि मैंने कब जमीन बेची। उसने खरीद भी ली।

देवास जिले की बागली तहसील के कंडिया गांव में मजदूरी करके जीवन यापन कर रहे बुजुर्ग आदिवासी भोला आला चारण बेबसी के साथ यह बात बताते हैं। गुरुवार वे मप्र सरकार द्वारा सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों को दिए गए पुनर्वास पैकेज में हुए कथित भ्रष्टाचार और फर्जी रजिस्ट्री मामले के लिए गठित जस्टिस (सेवानिवृत्त) एसएस झा आयोग के समक्ष उपस्थित होने आए थे। एक कटी-फटी पोलिथिन की थैली में वे कूपन, पावती जैसे दस्तावेज लेकर आए थे, ताकि खुद को भोला चारण साबित कर सके। आयोग ने उन्हें जमीन बेचने वाला मानकर बुलाया। सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि रजिस्ट्री रिकार्ड में यह खुलासा हुआ कि बुजुर्ग भोला की जगह किसी नौजवान का फोटो लगा है, यानी फर्जी व्यक्ति ने जमीन बेच दी। भोला की तरह ही करीब दो दर्जन आदिवासी यहां आए थे। फर्जी रजिस्ट्री के जरिए इनके साथ जमीन का खेल कर दिया गया। आयोग 11 अगस्त तक सुनवाई करेगा।

पंचायत से रिकार्ड गायब : मेधा पाटकर


नर्मदा बताओ आंदोलन की मेधा पाटकर सुनवाई के तीसरे दिन आयोग के समक्ष मौजूद थीं। उन्होंने 'पत्रिकाÓ को बताया कई मामलों में जमीन के रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। पंचायतों से नामांतरण पंजी ही गायब हैं। चूंकि यह भ्रष्टाचार सरकारी मशीनरी के साथ मिलकर हुआ है, इसलिए दस्तावेजों को छुपाया भी जा रहा होगा। 2500 से अधिक फर्जी रजिस्ट्रियां हुईं, जिस पर करीब 300 करोड़ शासन की तिजोरी से व्यर्थ गए। दलालों और अफसरों ने जमीन हड़पकर विस्थापितों को भूमिहीन कर छोड़ा। मप्र सरकार भी मान चुकी है कि 750 से अधिक रजिस्ट्रियां फर्जी हैं। हर मामले में सरकार की ओर से साढ़े पांच लाख रुपए का भुगतान किया गया है। 


News in Patrika on 6th August 2010

सामने आईं फर्जी रजिस्ट्रियां

फर्जी रजिस्ट्री कांड पर जस्टिस झा आयोग की सुनवाई शुरू



अलिराजपुर की तरह ही देवास जिले में भी फर्जी रजिस्ट्रियां हुई हैं। इस बात की पुष्टि मंगलवार तक हुई जब नर्मदा घाटी बने सरदार सरोवर बांध के संबंध में मप्र सरकार द्वारा विस्थापितों को दिए गए पुनर्वास पैकेज में हुए कथित भ्रष्टाचार और फर्जी रजिस्ट्री मामले के लिए गठित जस्टिस एसएस झा आयोग की इंदौर में सुनवाई शुरू हुई। देवास जिले के बागली तहसील के शिकायतकर्ताओं ने आयोग के समक्ष बयान दिए। इस मौके पर नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर भी मौजूद थीं। सुनवाई 11 अगस्त तक होगी। 

देवास जिले में 2006 से 08 तक की गई 11 रजिस्ट्रियों की जांच हुई। खातेगांव के विक्रेता रमेश पिता रामरतन व क्रेता सुरेश पिता हरीसिंह (उरदना मनावर) की खरीदी बिक्री में फोटो के साथ कई बातें फर्जी पाईं गईं। एक अन्य मामले में गुराड़दा निवासी शांताबाई मांगीलाल की करीब छह हेक्टेयर जमीन बगैर जानकारी के तीन व्यक्तियों का बाचने की बात समाने आई। आयोग को बताया गया कि शांताबाई की जमीन किसी और महिला का फोटो लगाकर बेच दी गई। अलीराजपुर जिले में भी आयोग को सुनवाई के दौरान ऐसे ही मामले मिले थे। सुनवाई की बहस में एनवीडीए अधिकारी, एसडीएम, रजिस्ट्रार मौजूद थे।

300 करोड़ का है मामला
नर्मदा बचाओ आंदोलन के मुताबिक 2500 से अधिक फर्जी रजिस्ट्रियां हुईं, जिस पर करीब 300 करोड़ शासन की तिजोरी से व्यर्थ गए। दलालों और अफसरों ने जमीन हड़पकर विस्थापितों को भूमिहीन कर छोड़ा। मप्र सरकार भी मान चुकी है कि 750 से अधिक रजिस्ट्रियां फर्जी हैं। हर मामले में सरकार की ओर से साढ़े पांच लाख रुपए का भुगतान किया गया है।


News in Patrika on 4th August 2010