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मंगलवार, 31 अगस्त 2010

टेलीग्राम को माना जनहित याचिका

- जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के खिलाफ मप्र के चीफ जस्टिस को इंदौर से भेजा था तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सयैय्द रफत आलम ने गुरुवार को एक टेलीग्राम को जनहित याचिका माना है। उन्हें यह टेलीग्राम इंदौर के न्यायिक कार्यकर्ता सत्यपाल आनंद ने पूरे राज्य में जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बारे में भेजा था। आनंद ने कोर्ट से हड़ताली डॉक्टरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दायर करने की मांग की है। टेलीग्राम को याचिका मानने का मध्यप्रदेश में संभवत: यह पहला मामला है।

 बुधवार प्रात: 9.15 बजे आनंद ने चीफ जस्टिस को एक तार भेजा था। इसमें उन्होंने मांग की थी डॉक्टरों की हड़ताल से आम जनता को संविधान में प्रदत्त जीवन सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार खतरे में आ गया है। डॉक्टरों को तत्काल सेवा में बुलाया जाए और अस्पतालों की सेवाएं बहाल की जाए। गुरुवार दोपहर 4 बजे आनंद को हाईकोर्ट से सूचना मिली कि उनके तार को लेटर पीटिशन (पत्र याचिका) माना गया है। इस पर शुक्रवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।

जा नहीं पाएंगे आंनद
आनंद ने 'पत्रिकाÓ को बताया आंखों की बीमारी के कारण मैं जबलपुर नहीं जा सकूंगा। मैंने कोर्ट से आग्रह किया है मेरी ही जनहित याचिका (8340/09) में 18 नवंबर 2009 को हुए आदेश के मुताबिक राज्य सरकार और डॉक्टर को नोटिस जारी किए जाएं। उन्होंने अगली सुनवाई इंदौर हाईकोर्ट में ही रखने का निवेदन भी कोर्ट से किया है।

लोगों के लिए खुला रास्ता
हाईकोर्ट के इस कदम से लोगों के लिए याचिका दायर करने का एक ओर रास्ता खुल गया है। अखबार, पोस्टकार्ड और किसी पत्र के जरिए तो पहले भी पत्र याचिकाएं मंजूर होती रही हैं। आनंद ने बताया मुझे हाईकोर्ट के इस फैसले की खुशी है, क्योंकि इससे न्यायिक क्षेत्र में एक नई शुरुआत होगी। किसी के मौलिक अधिकार का हनन होता है, तो उसे हाईकोर्ट में टेलीग्राम के जरिए सूचना भेजना चाहिए, ताकि न्यायपालिका उस दिशा में कदम उठा सके।

पत्रिका : २७ अगस्त २०१० 



जूडॉ हड़ताल पर कोर्ट ने सरकार से शपथपत्र पर मांगा जवाब
- टेलीग्राम पर मंजूर हुई जनहित याचिका पर जबलपुर में सुनवाई


सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हुई जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के विरोध में टेलीग्राम के जरिए मंजूर हुई जनहित याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने हड़ताल पर राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। सरकार को यह जवाब शपथपत्र पर देना होगा।

हड़ताल से लोगों की जीवन सुरक्षा के अधिकार के खतरे में पडऩे को आधार बनाकर आनंद ट्रस्ट के ट्रस्टी सत्यपाल आनंद ने बुधवार को मप्र के चीफ जस्टिस को टेलीग्राम भेजकर सरकार को निर्देश देकर तत्काल डॉक्टरों को बुलाने का आग्रह किया था। टेलीग्राम को गुरुवार को याचिका माना गया और शुक्रवार को चीफ जस्टिस सयैय्द रफत आलम और आलोक अराधे की युगलपीठ में सुनवाई हुई।

केस की जानकारी देरी से मिलने और बीमारी के कारण आनंद केस के दौरान उपस्थित नहीं हो सके। कोर्ट ने भी यह बात रिकॉर्ड पर ली कि आनंद को सूचना देरी से मिली। आनंद ने 'पत्रिकाÓ को बताया उन्हें खुशी है कि हड़ताल समाप्त होने के बाद भी कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की और सरकार को नोटिस दिया। अब सरकार को यह बताना होगा कि किन कारणों से हड़ताल हुई और लोगों के मौलिक अधिकारों का किन परिस्थितियों में उल्लंघन हुआ।

पत्रिका : २८ अगस्त २०१०

सोमवार, 23 अगस्त 2010

व्हिसल ब्लोअर की सफाई ?

चिन्मय मिश्र 

ये  किस तरह का समय है, जब पेड़ों के बारे में बात करना लगभग अपराध है।

मध्यप्रदेश में चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की आड़ में डॉ. आनंद राय की बर्खास्तगी उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए चेतावनी है, जो प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। डॉ. राय ने इंदौर के महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय व महाराजा यशवन्त राव अस्पताल में बिना अनुमति के बहुराष्ट्रीय दवाई कंपनियों के लिए किए जा रहे 'ड्रग ट्रायलÓ का पर्दाफाश किया था। उनकी बर्खास्तगी के आदेश को मीडिया के लिए भी एक चेतावनी माना जा सकता है। क्योंकि डॉ. राय द्वारा किए गए रहस्योद्घाटन को अंतत: मीडिया ने ही व्यापक समाज तक पहुंचाया था। इसलिए यह आदेश मीडिया को भी उसकी हैसियत बताने का तरीका है कि वे भले ही समाज हित के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगा दें, लेकिन प्रशासन वही करेगा जो कि उसके स्वयं के हित में है।

इस आदेश का अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि हड़ताल की वजह से जहां अन्य जूनियर डॉक्टर्स को 15 दिनों के लिए निलंबित किया गया है, वहीं डॉ. राय के अनुसार उन्होंने हड़ताल की अवधि में भी ओपीडी और इमरजेंसी विभाग में अपनी सेवाएं दी थी। इसके बावजूद सूत्रों का कहना है कि उन्हें 'बेहतरीÓ के लिए बर्खास्त किया गया है। सवाल उठता है कि यह किसकी बेहतरी के लिए किया गया है? हड़ताल के दौरान भी अपना काम करना क्या 'बेहतरीÓ की श्रेणी में नहीं आता? दरअसल बात बहुत दूर तक जा रही है। एक ओर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली तो चर्चा में थी ही, वहीं दूसरी ओर मई में प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा चार बहुराष्ट्रीय दवाई कंपनियों  नोवारिटस, बीएमएस, इलिलिली और फाइजर के सर्वोच्च अधिकारियों के साथ बैठक में भारतीय दवाई निर्माताओं का मानना है कि देश में निर्मित 'जेनेरिकÓ दवाइयों के कारण भारत व तीसरी दुनिया के देशों और कुछ हद तक विकसित देशों में भी दवाई की कीमतें काबू में रहती हैं। यदि बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बात मान ली जाती है, तो आम आदमी को जीवनरक्षक दवाइयों के लिए काफी अधिक मूल्य देना होगा।

इसी दौरान मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के लिए सरकारी तौर पर चंदा इक_ा करना भी गंभीर मामला है। कहा जा रहा है कि पिछले वर्ष तत्कालीन कलेक्टर ने 'मनोकामना अभिषेक योजनाÓ के माध्यम से 4.5 करोड़ रुपये इक_े किए थे और इस बार तो जिलेभर में 'मनोकामना अभिषेक वर्ष 2010Ó समारोहित कर पांच करोड़ रुपये इक_े करने की योजना है। इस हेतु सरकारी अधिकारियों को नोडल ऑफिसर नियुक्त कर दिया गया है और रसीद कट्टे छपवाकर 'टारगेटÓ तय कर वितरित कर दिए गए हैं।

सरसरी तौर पर देखने में उक्त दोनों मामलों में कोई समानता नजर नहीं आएगी, परन्तु गहराई से देखने पर समझ में आता है कि दोनों मामलों में शासन-प्रशासन अपनी तरह से मूल्य व मानक तय कर रहा है। 'व्हिसल ब्लोअरÓ बिल को अभी कैबिनेट से ही सहमति मिली है, अतएव प्रशासन में रहकर भ्रष्टाचार उजागर करने वालों की अभी खैर नहीं है। इस अधिनियम के अभाव में सूचना का अधिकार कानून को लेकर अमित जेठवा जैसे भ्रष्टाचार उजागर करने वालों का हश्र हम देख चुके हैं।

सरकारें भी चाहती हैं कि व्हिसल ब्लोअर अधिनियम पारित होने से पहले जितनी 'सफाईÓ संभव हो कर ली जाए परन्तु यह विध्वंसकारी परिपाटी है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र को बचाया जाना चाहिए। दहशत फैलाने की कोशिशों के समक्ष चुप बैठना भी समझदारी नहीं है।


चिन्मय मिश्र  सामाजिक कार्यकर्ता  हैं.
पत्रिका : २३ अगस्त २०१०

हड़ताली 30 जूनियर डॉक्टर निलंबित

- पांच दिन से कर रखी सेवाएं ठप, सरकार का कड़ा फैसला


पांच दिन से 20 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे एमजीएम मेडिकल कॉलेज के 30 जूनियर डॉक्टरों को शनिवार रात सरकार ने निलंबित कर दिया है। ये सभी जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी है। इनसे होस्टल भी खाली करवाए जाएंगे। हड़तालियों को उकसाने का आरोप मढ़ कर सिनीयर रेसीडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी निष्काषित किया गया है।  

हड़ताल के कारण मरीजों की दुर्दशा देखते हुए शासन ने यह कड़ा निर्णय लिया है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. एमके सारस्वत ने बताया शासन के निर्देश के आधार पर देर रात कॉलेज काउंसिल की बैठक बुलाई गई। इसमें निलंबन और बर्खास्तगी का फैसला किया गया। ज्ञात रहे शुक्रवार को चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेन्द्र हार्डिया चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव आईएस दाणी और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव एसआर मोहंती के साथ जूडॉ की बैठक बेनतीजा रहने और जूडा के हड़ताल खत्म नहीं करने को शासन ने गंभीर लापरवाही माना है। डीन ने बताया जो जूडॉ काम पर लौटेंगे, उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी। मेडिसिन विभाग में पदस्थ एक लेडी डॉक्टर को भी नोटिस दिया जा रहा है, क्योंकि वे पंद्रह दिन से सेवा पर नहीं आई हैं।


व्हिसल ब्लोअर पर सरकारी तंत्र का हमला  
हड़ताल करने वालों के साथ ही सिनीयर रेसीडेंट एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. आनंद राय को भी बर्खास्त कर दिया गया है। राय पर आरोप है कि उन्होंने हड़तालियों को उकसाया। डॉ. राय व्हिसल ब्लोअर (भ्रष्टाचार सचेतक) हैं, जो सरकारी तंत्र की बुराइयों को उजागर करते रहते हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में जारी ड्रग ट्रायल के गोरखधंधे के खुलासे में भी डॉ. राय की अग्रणी भूमिका रही है। विभाग के कई डॉक्टरों ने हड़ताल को एक मौके के रूप में लिया और अनावश्यक आरोप लगाकर बर्खास्त करवा दिया। डॉ. राय ने 'पत्रिकाÓ को बताया हड़ताल के दौरान में मैं लगातार ड्यूटी दे रहा हूं। ओपीडी और इमरजेंसी सेवा दे रहा हूं, फिर भी मुझे बर्खास्त कर दिया।

इन्हें किया निलंबित
जेडीए अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, उपाध्यक्ष जितेंद्र चौहान, सचिव मुकेश शर्मा, कोषाध्यक्ष विजय शंकर, अपूर्व गर्ग, सहायक सचिव पल्लवी चौधरी, अक्षय गुप्ता, गिरीश चतुर्वेदी, लक्ष्मण अहिरवार, संयुक्त सचिव अनिता सिंह, संक ल्प जोशी, भूपेंद्र चौहान, अफसर खान, सलाहकार अंकित वर्मा, कीर्तिमानसिंह, हिमांशु अग्रवाल, विनय वर्मा, दीपक कुमार, कमेटी कार्डिनेटर अमित यादव, निकेत राय, शिवानी पांडे, यश श्रीवास्तव, एक्जीक्यूटिव सदस्य गौरी राय, विद्या शर्मा, श्रद्धा दक्षा, विभूति तोमर, किशोर जैशी, दीपक शर्मा, मनोज गुप्ता, मनीष करोठिया।

' जितनी कड़ी कार्रवाई करेंगे, उतनी ही मजबूती से हम लड़ेंगे। हमारी मांगे जायज हैं। दरअसल, सरकार बातचीत से मसलों का हल निकालना नहीं चाहती है। मांगे पूरी नहीं होने तक हड़ताल पूरे राज्य में जारी रहेगी।Ó
- डॉ. विक्रांत भूरिया, प्रदेश अध्यक्ष, जेडीए


 पत्रिका: २२ अगस्त २०१०