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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

केटीएस तुलसी ने की बॉबी की पैरवी

- जमानत याचिका पर इंदौर हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित

भू माफिया बॉबी छाबड़ा की पैरवी करने के लिए ख्यात लॉयर केटीएस तुलसी बुधवार को दिल्ली से इंदौर हाईकोर्ट आए। जस्टिस पीके जायसवाल की कोर्ट में उन्होंने बॉबी को जमानत दिए जाने के पक्ष में तर्क रखे। कोर्ट ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा है। बॉबी के एडवोकेट एपी पोलेकर ने बताया एमआईजी थाने में दर्ज केस के सिलसिले में एडवोकेट तुलसी वकीलों के अपने दल के साथ इंदौर आए थे। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश देसाई ने पैरवी की।

11 बंगला केस में 31 मई को गिरफ्तार
तुलसी ने जिस केस में जमानत के लिए पैरवी की है, उसमें एमआईजी पुलिस ने बॉबी को 31 मई को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि सविता गृहनिर्माण संस्था की आड़ में बॉबी ने 11 बंगले के बगीचे की जमीन बेच दी और सहकारिता विभाग से तथ्य छुपाए। मामले में संचखंड और शिवाशीष गृहनिर्माण संस्था की मिलीभगत का खुलासा भी कागजात से हो चुका है। इस केस में चरणजीतसिंह सैनी और नितिन रामचंद्र को भी आरोपी बनाया गया है।

Patrika 28 oct 2010

गुरुवार, 30 सितंबर 2010

हमने कोर्ट के आदेश पर ही की कार्रवाई

- मनी सेंटर मामले में हाईकोर्ट में आईडीए का जवाब पेश

भूमाफिया बॉबी छाबड़ा के विवादित मनी सेंटर की लीज निरस्ती के मामले में आईडीए ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर दिया है। आईडीए ने कहा है कि कोर्ट के आदेश के अनुसार ही पूरी कार्रवाई की गई है। लीज शर्तों का उल्लंघन करने के कारण ही लीज निरस्त करके मनी सेंटर पर कब्जा लेने का फैसला किया गया है। इस जवाब पर 11 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

मनी सेंटर के दुकान मालिक मंजुलता गर्ग और विनय जैन ने याचिका में तर्क दिया है कि लीज शर्तों के आधार पर तय तमाम औपचारिकताएं पूरी देखकर ही डॉ. सजनी बजाज से दुकानें खरीदी गई हैं। भले ही लीज निरस्त हो जाए, लेकिन कानूनन उन्हें हटाया नहीं जा सकता है। कोर्ट में आईडीए ने इसी पर जवाब पेश करके बताया चूंकि हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि दुकान मालिकों की सुनवाई करके ही फैसला करें, इसलिए सुनवाई पूरी कर ली गई है। इसके बाद ही लीज निरस्त का कदम उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर सिनीयर एडवोकेट एके सेठी ने आईडीए के जवाब पर तर्क प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। इसी पर जस्टिस एससी शर्मा की कोर्ट ने अगली तारीख तय की। आईडीए की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट अशोक कुटंबले और डॉ. सजनी बजाज की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट जीएम चाफेकर ने पैरवी की।
पत्रिका : २९ सितम्बर २०१०

विनयनगर के खेल में शालिनी ताई भी छली गई

- बॉबी ने टिका दिया था सड़क का प्लॉट
- हाईकोर्ट के फैसले के बाद खुल रही परतें



झूठ की बुनियाद पर विनय नगर की चालीस फीट चौड़ी सड़क पर मकानों के नक्शे पास करने के केस में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद परतें खुल रही हैं। गड़बड़ी में निगम के इंजीनियर परिवार के शामिल होने के बाद जानकारी मिली है कि जमीन के इस खेल में ख्यात शिक्षाविद शालिनी ताई मोघे भी ठगी जा चुकी हैं। मामले में भूमाफिया बॉबी छाबड़ा भी अहम किरदार हैं।

'पत्रिकाÓ ने रविवार के अंक में 'बागड़ खा गई खेतÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित करके खुलासा किया था कि निगम के पूर्व इंजीनियर अमृतलाल (अंबू) पटेल और मौजूदा इंजीनियर दीपक पटेल के परिवार ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सड़क के हिस्से को हथिया लिया। इस खेल में सरकारी विभागों ने उनकी हर स्तर पर मदद की। 'पत्रिकाÓ पड़ताल में साफ हुआ है कि सड़क पर काटा गया दूसरा प्लॉट (188-ए) हर्षा सतीश वाधवानी ने शालिनीताई से खरीदा था। ताई को यह प्लॉट बॉबी ने बेचा था। 

बॉबी ने बेहद चतुराई से रिश्तों को भुनाया
 बॉबी ने दस वर्ष पहले शालिनी ताई को उलझा था। बात 2000 की है, तब ताई 2/3 स्नेहलतागंज के स्वयं के मकान में रहती थीं। मकान जर्जर हो रहा था, इसलिए मोघे दंपत्ति (ताई और स्व. मोरेश्वर मोघे) ने उसे बेचने का मन बनाया। किसी परिचित ने बॉबी से मिलवाया। उसने मकान खरीदने के साथ ही वादा किया आपकी जमीन पर एक मल्टी बनाऊंगा और उसमें से एक फ्लैट आपको दूंगा। मल्टी बने तब तक आप मेरे 10, आदर्श नगर की तल मंजिल पर रहें। मोघे परिवार इस पर राजी हो गया। बॉबी ने कब्जा लिया और ताई आदर्श नगर में शिफ्ट हो गईं। बॉबी ने मल्टी बनाने के बजाए स्नेहलतागंज की जमीन नितिन पल्टनवाले को बेच दी, लेकिन ताई से किया वादा पीछे ही रह गया। चूंकि सारे वादे मौखिक थे, इसलिए ताई को फ्लैट नहीं मिल सका। इसी बीच बॉबी ने विनय नगर का उक्त प्लॉट (188-ए) ताई को दे दिया। ताई का परिवार इससे खुश था, लेकिन जब उन्होंने इस प्लॉट को बेचने की कोशिश की तो वह बिक नहीं सका। बाद में 2008 में बॉबी ने ही उसे बिकवाया। जो रुपया आया उसी से ताई ने 3/2 पगनीसपागा स्थित सीएमआर रॉयल रिजेंसी में एक छोटा सा फ्लैट खरीदा। अभी वे वहीं रहती हैं।    

हमारे बीच में ज्यादा बात नहीं होती थी  
फिलहाल ताई खुश हैं और अपने क्षमाशील स्वभाव के मुताबिक कहती हैं बॉबी ने मुझे कोई तकलीफ नहीं दी। मैं उनके घर में रहती जरूर थी, लेकिन उनके परिवार और हमारे बीच में ज्यादा बातचीत नहीं होती थी। हम नीचे रहते थे और उनका परिवार ऊपर। बॉबी के पिता हम लोगों का खासा ध्यान रखते थे। मैं यह कभी नहीं भूल सकती कि मोघेजी (स्व. मोरेश्वर मोघे) की बीमारी में उनके परिवार ने हमारी पूरी मदद की थी। विनयनगर प्लॉट लफड़े के बारे में वे कहती हैं, मुझे इसकी बहुत जानकारी नहीं क्योंकि उस समय मोघेजी जिंदा थे और उन्होंने ही बॉबी से चर्चा की थी। 

पत्रिका : २७ सितम्बर २०१०

रविवार, 5 सितंबर 2010

अफसरों को याद आए दफन आदेश

- सवा सौ करोड़ की जमीन पर अब लिया कब्जा
- एक वर्ष पहले हाईकोर्ट जस्टिस एएम सप्रे दिया था निगम और पीडब्ल्यूडी के पक्ष में फैसला
- बॉबी के मनी सेंटर की लीज निरस्ती और आईडीए के दो अफसरों की गिरफ्तारी के बदला दृश्य


भूमाफिया बॉबी छाबड़ा के मनी सेंटर की लीज निरस्ती होने और दो गार्डनों की जमीनों में घालमेल करने के आरोप में आईडीए के दो अफसरों की गिरफ्तारी के बाद नगरनिगम, आईडीए, पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन की फाइलों में दफन हाईकोर्ट के आदेश बाहर आने लगे हैं। निगम, पीडब्ल्यूडी और नजूल विभाग ने ऐसे ही एक आदेश की धूल फटकारकर शनिवार को करीब 125 करोड़ रुपए की एक जमीन पर अपना मालिकाना हक जताया और पार्किंग विकसित करने की योजना भी घोषित कर दी।

जमीन ग्रेटर कैलाश अस्पताल रोड पर स्थित चर्च के बगल में स्थित है। इसका आकार 14 हजार वर्ग फीट है। जस्टिस एएम सप्रे ने 25 अगस्त 2009 को दिए फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि पलासिया हाना के सर्वे क्रमांक 274-275/2 की जमीन पीडब्ल्यूडी और नगरनिगम की है। जमीन पर अनिल पिता परसराम गायकवाड़ ने मालिकाना हक जमाकर हाईकोर्ट में सेकंड अपील दायर की थी। निगम, नजूल और पीडब्ल्यूडी ने इस फैसले को तवज्जो ही नहीं दी।


दो बार बेच दी जमीन
एडीजे कोर्ट ने वर्ष 1992 में अनिल गायकवाड़ के पक्ष में जमीन की डिक्री कर दी थी। इसी आधार पर उन्होंने दो बार जमीन को बेच दिया, जबकि 1994 में ही एडीजे कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी थी। हाल ही में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने नामांतरण के लिए निगम में आवेदन लगाया था, जिसे खारिज कर दिया गया। शुक्रवार को कब्जा लेने पहुंची निगम की टीम के सामने कोई जमीन मालिक नहीं आया।


अतिक्रमण हटाया, बोर्ड ताना
इस जमीन के सामने कुछ पक्का अतिक्रमण भी हो गया था। कब्जा लेने पहुंचे अफसरों ने इसे हटवाया और पीडब्ल्यूडी और निगम के संयुक्त कब्जे का बोर्ड तान दिया।


निगम की पार्किंग या मेडिकल कॉलेज का अस्पताल ?
जमीन के पास ही कल्याणमल नर्सिंगहोम मौजूद है, जो कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज की संपत्ति है। सूत्रों का कहना है कि इस जमीन में जो हिस्सा पीडब्ल्यूडी का है, वह कॉलेज की संपत्ति है। कॉलेज ने करीब एक वर्ष पहले कब्जे की कवायद शुरू की थी, परंतु कमजोर प्रशासनिक कदमों के कारण कामयाबी नहीं मिल सकी। अब कॉलेज अपना हिस्सा पाने में सफल हुआ तो वहां अस्पताल बनाने का रास्ता साफ होगा। निगम के हिस्से में मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जा सकती है, क्योंकि ग्रेटर कैलाश रोड पर सार्वजनिक पार्किंग का इंतजाम नहीं है।


बॉबी और आईडीए अफसरों के हश्र ने बढ़ाई चिंता
बॉबी छाबड़ा के मनी सेंटर की लीज निरस्ती को लेकर हाईकोर्ट ने तीन वर्ष पहले फैसला सुना दिया था, लेकिन आईडीए के कुछ अफसर उसे दबाकर बैठ गए थे। हाल ही में हाईकोर्ट ने इस मामले में आईडीए को फटकार लगाकर संभागायुक्त को आदेश दिए थे कि उन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्होंने फैसला रोका। इसे देखते हुए ही शुक्रवार को मनी सेंटर की लीज निरस्त कर दी गई। उधर, बॉबी को फायदा पहुंचाने के आरोप में गुरुवार को आईडीए के अधिकारी अशोक जैन व सुरेश भंवर को तुकोगंज पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन्हीं दो घटनाओं के कारण अफसरों को चिंता सताने लगी और यह पुराना आदेश बाहर आया है।


फैसला करीब एक वर्ष पुराना है। कार्रवाई लंबित थी, जो शनिवार को कर दी। फिलहाल जमीन पर किसी अन्य ने मालिकाना हक नहीं जमाया है। निगम की योजना जमीन पर पार्किंग विकसित करने की रहेगी, क्योंकि इस क्षेत्र में पार्किंग की समस्या है।
- केदारसिंह, उपायुक्त, नगरनिगम

 
पत्रिका : ०५ सितम्बर २०१०