पत्रिका : १८ अगस्त २०१०
पेशा होने के साथ ही पेशन भी...इन्ही के साथ दिन, रात, नींद, सपने ... और इन्ही की हकीकत, इन्ही के फसाने...
प्रभात झा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
प्रभात झा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, 18 अगस्त 2010
प्रभात झा केस पर हाईकोर्ट में सुनवाई
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा न्यायपालिका पर की टिप्पणी को लेकर दायर अवमानना याचिका की मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता इंदर प्रजापत के एडवोकेट मनोहर दलाल ने बताया जस्टिस एसएल कोचर और जस्टिस शुभदा वाघमारे की युगलपीठ में सुनवाई हो चुकी है। ज्ञात रहे पिछले माह इंदौर में बगैर अनुमति भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष जीतू जिराती के स्वागत में रैली निकाली थी। रैली प्रतिबंधित मार्गों पर निकाली गई। मामले में मीडिया ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष झा से प्रश्न पूछा था कि हाईकोर्ट द्वारा प्रतिबंधित मार्गों पर रैली निकालना क्या उचित था। इस पर उन्होंने कहा था कि कोर्ट के कारण क्या उत्सव मनाना छोड़ दें। कोर्ट से समाज नहीं चलता बल्कि समाज से कोर्ट चलता है।
शुक्रवार, 13 अगस्त 2010
प्रभात झा केस में अब 17 को सुनवाई
भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष जीतू जिराती की रैली के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा कथित रूप से न्यायपालिका पर की गई टिप्पणी पर लगी अवमानना याचिका पर अब 17 अगस्त को सुनवाई होगी। कांग्रेस नेता इंदर प्रजापत द्वारा दायर इस याचिका पर बुधवार को जस्टिस एलएल कोचर और जस्टिस शुभदा वाघमारे की युगलपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील मनोहर दलाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कोर्ट ने कुछ जानकारियां मांगी है, जिन्हें अगली सुनवाई में पेश कर दिया जाएगा। ज्ञात रहे मीडिया में झा का यह बयान प्रकाशित हुआ था कि समाज से कोर्ट चलता है, कोर्ट से समाज नहीं।
News in Patrika on 13th August 2010
बुधवार, 11 अगस्त 2010
सिरकाट कर लाओगे तो भी कर दूंगा मदद
उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बोल
उद्योग मंत्री कैलाश विजयगर्वीय ने भाजपा कार्यकर्ताओं का संदेश दिया है कि सिर काटकर लाने पर भी वे कार्यकर्ताओं की मदद कर देंगे, परंतु पेड़ काटकर लाए तो सजा मिलेगी। उन्होंने खुद ही अपने इस संदेश को जनता के बीच में हंसते-हंसते सुनाया।
विजयवर्गीय रविवार को महू विधानसभा क्षेत्र के आशापुरा गांव में वन मंत्री सरताज सिंह के साथ पौधारोपण कार्यक्रम में बतौर अतिथि शामिल हुए। उक्त कथन की जानकारी देते हुए उन्होंने मंच से ही कहा यह बात मैंने पिछले दिनों कार्यकर्ताओं की एक बैठक में भी कही थी।
कैमरे बंद करवाए
विजयवर्गीय ने मौजूद मीडियाकर्मियों की ओर इशारा करके कहा, अपने कैमरे बंद कर लो, क्योंकि अब मैं जो बोलूंगा वह छापना या दिखाना नहीं है। वैसे भी मुझे मालूम है महू के पत्रकार काफी समझदार हैं।
खाली जमीन देख मुंह में आता है पानी
जमीन विवादों से घिरे कैलाश ने यह भी कह डाला कि सरकार की खाली पड़ी जमीनों के देखकर हमारे मुंह में पानी आता हैं। बाद में थोड़ा संभलकर बोले खाली पड़ी जमीन पर लोग कब्जा कर लेते है, इससे अच्छा है उन पर पौधारोपण कर दिया जाए।
भाजपा को ये क्या हो गया
नितिन गडकरी, राष्टरीय अध्यक्ष
13 मई - बड़े दहाड़ते थे शेर जैसे, बाद में कुत्तों की तरह सोनिया और कांग्रेस के तलवे चाटने लगे। (मुलायम और लालू यादव के लिए)
4 जुलाई - फांसी का मुद्दा क्यों लटका रखा है, क्या अफजल गुरु कांग्रेस का दामाद है ?
12 जुलाई -दिग्विजय आजमगढ़ क्यों जाते हैं, क्या वे औरंगजेब की औलाद हैं।
प्रभात झा, प्रदेश अध्यक्ष
16 जुलाई- मुझे चिंता होने लगी है कि कहीं दिग्विजय सिंह नक्सलियों के एजेंट तो नहीं।
29 जुलाई- समाज से कोर्ट चलता है, कोर्ट से समाज नहीं। कल से कोर्ट कह देगा तो क्या दीपावली भी नहीं मनाएंगे? क्या मिठाई नहीं खाएंगे? रोक के बाद पटाखे तो फोड़े जाते हैं। इंदौर में क्या धारा 370 लगी है ...जम्मू-कश्मीर है क्या?
31 जुलाई - बीएसएफ और सीआरपीएफ, सब डकैत हो गए हैं। ये लोग हथियारों और बंदूकों की तस्करी कर रहे हैं और नक्सलियों को बेच रहे हैं।
उद्योग मंत्री कैलाश विजयगर्वीय ने भाजपा कार्यकर्ताओं का संदेश दिया है कि सिर काटकर लाने पर भी वे कार्यकर्ताओं की मदद कर देंगे, परंतु पेड़ काटकर लाए तो सजा मिलेगी। उन्होंने खुद ही अपने इस संदेश को जनता के बीच में हंसते-हंसते सुनाया।
विजयवर्गीय रविवार को महू विधानसभा क्षेत्र के आशापुरा गांव में वन मंत्री सरताज सिंह के साथ पौधारोपण कार्यक्रम में बतौर अतिथि शामिल हुए। उक्त कथन की जानकारी देते हुए उन्होंने मंच से ही कहा यह बात मैंने पिछले दिनों कार्यकर्ताओं की एक बैठक में भी कही थी।
कैमरे बंद करवाए
विजयवर्गीय ने मौजूद मीडियाकर्मियों की ओर इशारा करके कहा, अपने कैमरे बंद कर लो, क्योंकि अब मैं जो बोलूंगा वह छापना या दिखाना नहीं है। वैसे भी मुझे मालूम है महू के पत्रकार काफी समझदार हैं।
खाली जमीन देख मुंह में आता है पानी
जमीन विवादों से घिरे कैलाश ने यह भी कह डाला कि सरकार की खाली पड़ी जमीनों के देखकर हमारे मुंह में पानी आता हैं। बाद में थोड़ा संभलकर बोले खाली पड़ी जमीन पर लोग कब्जा कर लेते है, इससे अच्छा है उन पर पौधारोपण कर दिया जाए।
भाजपा को ये क्या हो गया
नितिन गडकरी, राष्टरीय अध्यक्ष
13 मई - बड़े दहाड़ते थे शेर जैसे, बाद में कुत्तों की तरह सोनिया और कांग्रेस के तलवे चाटने लगे। (मुलायम और लालू यादव के लिए)
4 जुलाई - फांसी का मुद्दा क्यों लटका रखा है, क्या अफजल गुरु कांग्रेस का दामाद है ?
12 जुलाई -दिग्विजय आजमगढ़ क्यों जाते हैं, क्या वे औरंगजेब की औलाद हैं।
प्रभात झा, प्रदेश अध्यक्ष
16 जुलाई- मुझे चिंता होने लगी है कि कहीं दिग्विजय सिंह नक्सलियों के एजेंट तो नहीं।
29 जुलाई- समाज से कोर्ट चलता है, कोर्ट से समाज नहीं। कल से कोर्ट कह देगा तो क्या दीपावली भी नहीं मनाएंगे? क्या मिठाई नहीं खाएंगे? रोक के बाद पटाखे तो फोड़े जाते हैं। इंदौर में क्या धारा 370 लगी है ...जम्मू-कश्मीर है क्या?
31 जुलाई - बीएसएफ और सीआरपीएफ, सब डकैत हो गए हैं। ये लोग हथियारों और बंदूकों की तस्करी कर रहे हैं और नक्सलियों को बेच रहे हैं।
पत्रिका में २ अगस्त २०१० को प्रकाशित
लेबल:
इंदौर,
कैलाश विजयवर्गीय,
नितिन गडकरी,
प्रभात झा,
भाजपा
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
