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सोमवार, 3 जनवरी 2011

पता गलत, रिकॉर्ड चोरी

- विक्रयकर विभागीय अल्पआय वाले चतुर्थ वर्ग श्रेणी कर्मचारी हाउसिंग सोसाइटी में कई घपले


मप्र विक्रयकर विभागीय अल्पआय वाले चतुर्थ वर्ग श्रेणी कर्मचारी हाउसिंग सोसाइटी में एक नहीं कई गड़बडिय़ां हुई है। गड़बडिय़ों के लिए दस लोगों पर आरोप सिद्ध हो चुके हैं। पत्रिका के पास मौजूद दस्तावेजों से साफ होता है कि सोसाइटी के कई वर्षों के दस्तावेज गायब हैं।

प्रबंधक के घर पर ऑफिस
जब सोसाइटी का पंजीयन हुआ था तब पता जेल रोड स्थित मदन कोठी पर था। बाद में दो ऑफिस और खुल गए। एक हरसिद्धी में व दूसरा खजराना में। सोबरन सिंह जब महाप्रबंधक बने तो उन्होंने अपने घर 101 चांदनी अपार्टमेंट, बैंक कॉलोनी पर ऑफिस खोल लिया। नियमानुसार यह गलत है।

आयकर विभाग के पास रिकॉर्ड
1991-92 के पहले तक रिकार्ड तत्कालीन कोषाध्यक्ष नबी मोहम्मद के पास था। 23 मार्च 1998 को खजराना ऑफिस पर चोरी हुई व मूल रिकॉर्ड चोरी हो गया। बाद में एक मामले में मयूरनगर निवासी मुश्ताक पिता इदरिस के यहां डले एक आयकर छापे में सोसाइटी का कुछ रिकॉर्ड जब्त किया गया। यह आज भी आयकर विभाग के पास ही है। 

अपनों को बना दिया सदस्य
सोसाइटी को वर्ष 1996-97 में खजराना की जमीन मिली परंतु इसके पहले ही सदस्य बनाना व निकालना जारी रहा। संचालक मंडल ने पद का दुरुपयोग करते हुए सदस्य बनाए। सहकारिता विभाग ने इसी कारण संचालक मंडल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की सिफारिश की है।

महाप्रबंधक की गलत नियुक्ति
सोसाइटी अध्यक्ष किरण इंगले ने अप्रैल 1995 को सोबरन सिंह को महाप्रबंधक नियुक्त किया गया। उस वक्त वे सोसाइटी के सदस्य थे। नियमानुसार यह नहीं किया जा सकता है।



ये दस लोग दोषी साबित
सहकारिता विभाग की एक जांच में मौजूदा कर्र्ताधर्ता सोबरनसिंह के साथ ही भूतपूर्व अध्यक्ष किरण इंगले, उपाध्यक्ष रतनलाल राठौर, सचिव प्रदीप दुबे, संचालक रामआसरे मिश्रा, रमेश कुमार महिपाल, पुष्पलता घौसरिया, लियाकत अली, नवी मोहम्मद व शफी मोहम्मद पर पद के दुरुपयोग का आरोप साबित हो चुका है। उधर, एक कोर्ट केस में गुलाम नबी को रिकॉर्ड चोरी का आरोपी साबित किया है।

जांच अभी अधूरी है
सोसाइटी की पूरी जांच नहीं हो सकी है। सहकारी निरीक्षक प्रमोद तोमर व मोनिका सिंह ने तो अंतरिम निरीक्षण रिपोर्ट सौंपी है। इसमें जिन पर आरोप साबित हो चुका है, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
- महेंद्र दीक्षित, उपायुक्त, सहकारिता विभाग

जमीन व सोसाइटी मेरे पास
सहकारिता विभाग ने मुझे दोषी बताया है, जो कि गलत है। सोसाइटी का मैं वर्तमान अध्यक्ष हूं। इतना ही नहीं खजराना की पांच एकड़ जमीन भी सरकार ने मेरे नाम की है। चुनाव करवाकर मैं अपने हिसाब से जमीन के प्लॉट वितरित करुंगा।
- सोबरन सिंह, सोसइटी के कर्ताधर्ता



Patrika 03-01-2011

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

मेंदोला के खिलाफ थाने में एक और शिकायत

- भारतीय साख संस्था के सदस्य को धमकाने का आरोप
- थाने में हुई शिकायत, पर टीआई को जानकारी ही नहीं



विधायक रमेश मेंदोला के खिलाफ संयोगितागंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज हुई है। फरियादी का आरोप है मेंदोला ने पद का दुरुपयोग करते हुए उसे धमकाकर एक ऐसे कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए जिससे उसे पौने सात लाख रुपए का नुकसान हो गया। उधर, पुलिस ने शिकायत की जानकारी नहीं होने की बात कहकर चौंका दिया है। सुगनीदेवी कॉलेज परिसर की 100 करोड़ की जमीन के मामले में मेंदोला के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस भ्रष्टाचार का केस दर्ज कर चुकी है।

शिकायतकर्ता उदय जायसवाल भारतीय साख सहकारिता संस्था के सदस्य हैं। उनके मुताबिक ढाई महीने पहले नंदानगर साख सहकारिता संस्था अध्यक्ष रमेश मेंदोला, मैनेजर प्रवीण कंपलीकर, भारतीय साख संस्था अध्यक्ष महेश चौकसे कुछ अन्य लोगों के साथ उनके घर पर आए थे। भारतीय साख संस्था से मेरे 9 लाख रुपए लेना थे, लेकिन सभी ने दबाव बनाकर मुझसे सवा दो लाख रुपए लेने को कहा। इसके लिए उन्होंने मेरे और मेरी पत्नी से हस्ताक्षर भी करवा लिए। जायसवाल के वकील वाजिब खान ने बताया पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज कर लेना चाहिए। मामले में पद का दुरुपयोग, धमकाने, झगड़ा करने की नीयत से घर पर जाने की धाराएं लगाई जा सकती है।

मुझे फिलहाल कोई जानकारी नहीं
संयोगितागंज टीआई अनिलसिंह राठौर ने बताया पुलिस के पास फिलहाल इस किस्म की कोई शिकायत नहीं आई है। मुझे फिलहाल इस केस की कोई जानकारी नहीं है। देर रात थाने पर फोन किया तो बताया गया यहां अब तक कोई शिकायत नहीं आई है। उधर, जायसवाल के पास थाने की रिसीव्ड कॉपी मौजूद है।

दोनों संस्थाओं को एक करने की कोशिश
भारतीय साख संस्था को नंदानगर खास संस्था खुद में शामिल करना चाहती है। यही वजह है कि दोनों संस्थाओं के संचालक मंडल मिलकर भारतीय संस्था के बकायेदारों से जैसे-तैसे 'निपटनाÓ चाहते हैं। दोनों संस्थाओं की हाल ही में हुई साधारण सभा में मर्जर के प्रस्ताव पास किए जा चुके हैं। हालांकि, सदस्यों की दिली इ'छा नहीं है कि दोनों संस्थाएं एक हो।

पत्रिका : १७ सितम्बर २०१०