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रविवार, 3 अक्टूबर 2010

युगलपीठ में वाघमारे की अपील खारिज

- बीआरटीएस में आ रही जमीन का मामला


एबी रोड पर निर्माणाधीन बीआरटीएस में जमीन अधिग्रहण के मसले पर दायर एक रिट अपील हाईकोर्ट जस्टिस शांतनु केमकर और एसके सेठ की युगलपीठ ने खारिज कर दी। यह अपील रविंद्र रामचंद्र वाघमारे ने दायर की थी। मंगलवार को जस्टिस एससी शर्मा की एकल पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने एकलपीठ के निर्णय को सही माना।

ïमूल याचिका में तर्क दिया गया था कि नगरनिगम जमीन अधिग्रहण कर रहा है, लेकिन मुआवजा नहीं दे रहा। चूंकि जमीन निजी है, इसलिए मुआवजा याचिकाकर्ता का हक है। एकल पीठ ने इस तर्क को खारिज कर दिया था क्योंकि निगम के मुताबिक यह जमीन सेटबैक की है और कानूनन इसे निगम अधिग्रहित कर सकता है।

फिलहाल कोई केस नहीं
सूत्रों के मुताबिक बीआरटीएस को लेकर अब कोई मसला लंबित नहीं है। मंगलवार को ही पांच याचिकाएं हाईकोर्ट में लगी थी, इनमें से विजय हालान, जसवंत डोसी और मोहम्मद अकरम ने यह कहकर याचिका वापस ले ली थी कि उन्होंने जमीन निगम को दे दी है। वाघमारे की याचिका को खारिज कर दिया गया था, जबकि भंडारी कोठी से संबंधित भुवन कुमारी केस में निगम को सुनवाई के आदेश हुए थे।

 
पत्रिका : ०२ अक्टूबर २०१०

गुरुवार, 30 सितंबर 2010

बीआरटीएस पर लगी पांच याचिकाओं का निपटारा

- एक खारिज, तीन वापस और एक निगम के हवाले

बीआरटीएस के कारण जमीन अधिग्रहण को लेकर लगाई गई पांच याचिकाओं का मंगलवार को हाईकोर्ट में निपटारा हो गया। तीन ने अपनी याचिकाएं वापस ले ली, जबकि एक को कोर्ट ने खारिज कर दिया। एक अन्य के लिए नगरनिगम को सुनवाई का अधिकार सौंपा गया है।

जस्टिस एससी शर्मा की एकल पीठ में लगी याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि जमीन निजी है, इसलिए इसके एवज में मुआवजा दिया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान विजय हालान, जसवंत डोसी और मोहम्मद अकरम की ओर से बताया गया कि उन्होंने सड़क के लिए जमीन नगरनिगम को सौंप दी है, इसलिए याचिकाएं वापस लेना चाहते हैं। एक अन्य याचिकाकर्ता रवि वाघमारे के मुआवजे के तर्क को निगम के प्रतिउत्तर ने खारिज कर दिया। निगम ने कहा जमीन सेटबेक की है और उस पर निगम का अधिकार है। कोर्ट ने याचिका को निरस्त कर दिया। भंडारी कोठी से जुड़ी याचिका पर कोर्ट ने नगरनिगम को आदेश दिया है कि भुवन कुमारी की 19 अक्टूबर तक सुनवाई करके फैसला करें। याचिकाओं में निगम की ओर से एडवोकेट आनंद अग्रवाल ने पैरवी की।



पत्रिका : २९ सितम्बर २०१०