शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

तीन डॉक्टरों समेत नौ पर गैरइरादतन हत्या का केस

- निजी शिकायत पर कोर्ट का आदेश
- हुकुमचंद पॉलिक्लिनिक में डॉक्टरों की लापरवाही से गर्भस्थ शिशु मौत का मामला


14 महीने पहले हुकुमचंद पॉलिक्लिनिक में गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में कोर्ट ने तीन डॉक्टरों समेत नौ लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश शिशु की मां द्वारा कोर्ट में लगाई निजी शिकायत पर किया गया है। 

प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी आरती शर्मा की कोर्ट ने माना कि 17 जून की रात 9.30 बजे से 18 जून 2009 की प्रात: 11.30 बजे तक तीन लेडी डॉक्टरों समेत नौ कर्मचारियों ने गर्भवती प्रभावति गिरधारीलाल प्रजापति के इलाज में लापरवाही बरती और इससे गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। लिहाजा यह गैरइरादतन हत्या का मामला है। कोर्ट ने 8 सितंबर को सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं।

इनके खिलाफ हुआ केस
डॉ. कीर्ति चतुर्वेदी, डॉ. मुक्ता जैन, डॉ. कुसुम मारू, नर्स किरण नाइक, शैफाली चौहान, तिलोत्मा सिंह, जया पांडे, स्वीपर हेमलता और आया हेमलता।


ऐसी लापरवाही
- 17 जून की रात में डॉ. कीर्ति चतुर्वेदी, नर्स शैफाली, किरण, शारदा, जया, मनोरमा व हेमलता ड्यूटी पर थीं, लेकिन सभी ने गर्भवती की उपेक्षा की।

- 18 जून की प्रात: डॉ. मुक्ता जैन व डॉ. कुसुम मारू अस्पताल पहुंची, लेकिन इलाज के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया। यहां तक कि मेडिकल रिकॉर्ड में भी गर्भवती के बारे में सही जानकारी नहीं लिखी।



पुलिस पर सांठ-गांठ का आरोप
परिवादी के एडवोकेट बीएन राजपूत ने बताया केस की जांच तत्कालीन अपर कलेक्टर रेणु पंत ने करके स्वास्थ्य विभाग को नौ लोगों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज करने के निर्देश दिए थे। विभाग ने पुलिस को ऐसा करने के लिए कहा भी था, लेकिन सांठ-गांठ के चलते केस दर्ज नहीं हो सका। यही वजह है कि निजी शिकायत दर्ज करना पड़ी।


ऐसे किया स्वास्थ्य विभाग ने न्याय ?
स्वास्थ्य विभाग ने भी तीनों डॉक्टरों को दोषी माना था, लेकिन सजा महज दो-दो वेतनवृद्धि रोकने की दी थी। यह भी केवल दो वर्ष तक के लिए यानी इसके बाद उन्हें वेतनवृद्धि का फायदा मिलने लगेगा। इतना ही नहीं, जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट को कमजोर करने के लिए तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक डॉ. अशोक शर्मा ने तो डॉक्टरों को बचाने के लिए एक पत्र जारी कर दिया था। उन्होंने लिखा था डॉक्टरों पर केस करने से विभाग की बदनामी होगी।


'पेट दबा-दबाकर मेरे बच्चे को मार डालाÓ
दर्द शुरू होने के बाद मुझे मकान मालकिन ललिता कश्यप 17 जून को हुकमचंद पॉलीक्लिनिक ले गई। वहां भर्ती कर दिया। रात 11 बजे जब दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ तो मकान मालकिन ने मौजूद नर्स किरण नाइक से देखने को कहा। उसने यह कहकर भगा दिया कि सोने दो। रात दो बजे फिर उससे कहा तो उसने पेट दबा दिया। फिर 2000 रुपए ले लिए और कहा सुबह ऑपरेशन करेंगे। सुबह सात बजे फिर उससे देखने को कहा तो वह सात से आठ बजे तक पेट दबाती रही। आठ बजे यह कहकर चली गई कि मेरी डयूटी पूरी हो गई। सुबह 10.30 बजे डॉ. कुसुम मारू आई तो उन्होंने ऑपरेशन किया। इन लोगों ने मेरे बच्चे को दबा-दबा कर मार डाला।
(गर्भवती प्रभावती द्वारा घटना के संबंध में जिला प्रशासन को दिया गया बयान)


पत्रिका : १९ अगस्त २०१० 
30 जुलाई को प्रकाशित खबर

नवजात की मौत पर दो वेतनवृद्धि रोकने की सजा
- स्वास्थ्य विभाग का न्याय (?), जिला प्रशासन ने माना था गैरइरादतन हत्या का मामला
- हुकुमचंद पॉलिक्लिनिक में तीन महिला डॉक्टरों की लापरवाही से गई थी जान


गर्भस्थ शिशु की मौत के जिस मामले पर इंदौर जिला प्रशासन ने गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की सिफारिश की थी, उसमें स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी डॉक्टरों की दो-दो वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी किए हैं। विभाग ने घटना के दौरान हुकुमचंद पॉलिक्लिनिक में पदस्थ रही डॉ. कुसुमलता मारू, डॉ. मुक्ता जैन और डॉ. कीर्ति चतुर्वेदी को यह सजा सुनाई है। यह सजा भी दो वर्ष में समाप्त हो जाएगी, यानी इसके बाद उन्हें वेतनवृद्धि का फायदा मिलने लगेगा।

स्वास्थ्य विभाग के आदेश की पुष्टि करते हुए सीएमएचओ डॉ. शरद पंडित ने बताया जिला प्रशासन की सिफारिश पर विभागीय जांच की गई थी। इसमें तीनों डॉक्टरों पर आरोप सिद्ध हुआ है। शेष सात कर्मचारियों पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। विभाग में इसे बड़ा आर्थिक दंड माना जाता है। जिला प्रशासन के कहने पर सभी आरोपियों के खिलाफ सेंट्रल कोतवाली थाने पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की अर्जी दी थी, लेकिन पुलिस ने ऐसा किया ही नहीं।

अपर कलेक्टर रेणु पंत ने की थी जांच
तत्कालीन अपर कलेक्टर रेणु पंत ने इस मामले की जांच करके 100 से अधिक पेज की रिपोर्ट बनाई थी। इसी के आधार पर मामला पुलिस में गया था। बाद तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक डॉ. अशोक शर्मा ने एक पत्र जारी करके डॉक्टरों को लगभग बचा लिया था। उन्होंने लिखा था डॉक्टरों पर केस करने से विभाग की बदनाम

बुधवार, 18 अगस्त 2010

प्रभात झा केस पर हाईकोर्ट में सुनवाई

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा न्यायपालिका पर की टिप्पणी को लेकर दायर अवमानना याचिका की मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता इंदर प्रजापत के एडवोकेट मनोहर दलाल ने बताया जस्टिस एसएल कोचर और जस्टिस शुभदा वाघमारे की युगलपीठ में सुनवाई हो चुकी है। ज्ञात रहे पिछले माह इंदौर में बगैर अनुमति भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष जीतू जिराती के स्वागत में रैली निकाली थी। रैली प्रतिबंधित मार्गों पर निकाली गई। मामले में मीडिया ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष झा से प्रश्न पूछा था कि हाईकोर्ट द्वारा प्रतिबंधित मार्गों पर रैली निकालना क्या उचित था। इस पर उन्होंने कहा था कि कोर्ट के कारण क्या उत्सव मनाना छोड़ दें। कोर्ट से समाज नहीं चलता बल्कि समाज से कोर्ट चलता है। 

पत्रिका : १८ अगस्त २०१०

सीबीआई को भी बनाएं पार्टी


मालेगांव ब्लॉस्ट 
- दिलीप पाटीदार बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट का निर्देश


मालेगांव ब्लॉस्ट मामले में करीब पौने दो वर्ष से रहस्यमय तरीके से लापता दिलीप पाटीदार को लेकर चल रही बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को भी पार्टी बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सहायक सोलिसिटर जनरल से कहा केस की फाइल सीबीआई को भेजें और 9 सितंबर तक बताएं कि क्या इस केस की जांच सीबीआई करेगा?  

11 नवंबर 2008 को मुंबई एटीएस का दल खजराना क्षेत्र की शांतिविहार कॉलोनी से दिलीप पाटीदार को मालेगांव ब्लास्ट मामले में ले गया था। एटीएस कहती है कि उसे 18 नवंबर को छोड़ दिया गया, लेकिन इसके बाद से वह आज तक लापता है। दिलीप के भाई रामस्वरूप ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई, जिस पर लगातार सुनवाई चल रही है। पाटीदार की एडवोकेट रितु भार्गव और भुवन देशमुख और एटीएस एडवोकेट वी. वगाड़े मंगलवार को जस्टिस शांतनु केमकर और जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की युगलपीठ के समक्ष उपस्थित हुए।

एडवोकेट रितु भार्गव ने बताया हमने कोर्ट से सीबीआई जांच की मांग की थी, क्योंकि राज्य सरकार और मुंबई एटीएस इस मामले में अब तक कोई परिणाम नहीं दे सकी है। इसी पर कोर्ट ने सहायक सोलिसिटर जनरल विवेक शरण को बुलाकर इस संबंध में निर्देश दिए। शरण ने 'पत्रिकाÓ को बताया सीबीआई को केस की फाइल भेजी जाएगी। अगली तारीख तक इस पर जवाब पेश कर दिया जाएगा।


पत्रिका : १८ अगस्त २०१०

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

सिंधिया ने विजयवर्गीय को दिखा दी ताकत

- 80 से अधिक वरिष्ठ-कनिष्ठ क्रिकेटर ने मिलकर जताया भरोसा
- एमपीसीए का चुनावी रंग

मप्र क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव के पहले ही केंद्रीय उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को अपनी ताकत का अहसास मप्र के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को करवा दिया। वे सायाजी होटल की सातवीं मंजिल के कमरा नंबर 712 में रूके थे और वहां उनसे मिलने के लिए करीब 80 से अधिक वरिष्ठ और कनिष्ठ क्रिकेटर मौजूद थे। ये सभी एसोसिएशन के सदस्य हैं। सिंधिया ने 10-10 के ग्रुप में इन सभी से चाय की चुस्कियों के बीच इत्मिननान से मुलाकात की। सिलसिला रात 11.30 बजे तक चला। बुधवार को विजयवर्गीय ने भी श्रीमाया सेलिब्रिटी होटल में डीनर पार्टी दी थी, लेकिन उसमें महज 14 सदस्य ही पहुंचे थे।



कमरा नंबर 712 में बिछी एमपीसीए की फिल्डिंग


मप्र क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के चुनाव के पहले शनिवार को होटल सायाजी के कमरा नंबर 712 में मौजूदा अध्यक्ष सिंधिया की फिल्डिंग जमी। वे यहां पहुंचे और मिलने वाले सदस्यों की होड़ सी लग गई। हर कोई उनसे पहले मिलना चाहता था। उन्होंने सभी से सिलसिलेवार सबसे मुलाकात की।

एसोसिएशन के सचिव संजय जगदाले के साथ ही वहां गुलरेज अली, जितेंद्र जैन, श्रीराम अत्रे, अशोक कुमुट सुमन कामानी, भरत पलोड़, विनोद कुमुट, श्रवण गुप्ता, मोनी नारंग, कन्नू पंवार, भोलू मेहता, मुन्ना कादिर, अनिता अत्रे, नरेंद्र मेनन, महेंद्र सेठिया, डॉ. ऐके भार्गव, भगवानदास सुतार, वासु मंगवानी, नरेंद्र भगतरिया, एसके बायस आदि मौजूद थे। युवा क्रिकेटर अमय खुरासिया, अनिल वाघ, मुकेश साहनी, अमित भट्ट, नितिन कुलकर्णी, सुधीर अस्मानी भी थे। आगंतुकों का स्वागत करने के लिए होटल के मेनगेट पर जावरा विधायक महेंद्रसिंह कालूखेड़ा मौजूद थे, जबकि सातवीं मंजिल पर विधायक तुलसी सिलावट और शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन ने मोर्चा संभाल रखा था। पहले सीनियर सदस्यों की भेंट करवाई गई और बाद में नौजवानों की।

14 लोगों से अलग मुलाकात
होटल पहुंचने से पहले सिंधिया ने इमली बाजार निवासी विमल जैन के घर पर भी कुछ सदस्यों से भेंट की। वहां वे 14 सदस्यों से मिले।

किसी से समझौता नहीं होगा
सिंधिया के सामने कुछ लोगों ने पूछा कि विजयवर्गीय गुट समझौता टेबल पर आकर किसी 'पदÓ की मांग कर सकता है, ऐसे में क्या किया जाएगा। सिंधिया ने कहा किसी से समझौता नहीं होगा, क्योंकि एसोसिएशन आप लोगों का समूह चला रहा है।

व्यक्तिगत मुलाकात भी करेंगे
सिंधिया के नजदीकी लोगों ने बताया सिंधिया रविवार प्रात: इंदौर से रवाना हो जाएंगे और 20 अगस्त को फिर से लौटेंगे। बाद में वे कुछ वरिष्ठ सदस्यों के घर जाकर भी मुलाकात करेंगे। चुनाव 22 अगस्त को होंगे।

पद की गरिमा का सवाल है
एक बुजुर्ग सदस्य ने सिंधिया को भरोसा जताते हुए कहा यह पद की गरिमा का सवाल है और इस पर किसी कीमत पर ऐसे व्यक्ति को नहीं आने दिया जाएगा, जो गरिमा के अनुकूल न हो।

आपने ही इंदौर में मजबूत किया क्रिकेट
सिंधिया को लोगों ने भरोसा दिलाया कि हम आपकी शक्ति को पहचानते हैं और यह भी जानते हैं कि आपके कारण ही इंदौर में क्रिकेट को मजबूती मिली है। यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। सिंधिया वर्तमान में एमपीसीए के चेयरमैन हैं। 22 जुलाई को होने वाले चुनाव में विजयवर्गीय ने भी दावेदारी जताई है।


पत्रिका: १५ अगस्त २०१०

शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

मेडिकल कॉलेज को 1 करोड़ के दो हॉल

- कम्युनिटी मेडिसिन और फोरेंसिक मेडिसिन को सौगात

शनिवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज को दो विभागों को एक करोड़ रुपए की सौगात मिलेगी। कम्युनिटी मेडिसिन और फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डिमोस्ट्रेशन हॉलों को लोकार्पण किया जाएगा। इससे मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की मान्यता की जरूरी औपचारिकता पूरी हो जाएगी।

दोनों विभागों के ठीक पीछे ही ये हॉल बनाए गए हैं। चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री महेंद्र हार्डिया और संभागायुक्त बसंतप्रताप सिंह के आथित्य में दोपहर 12 बजे उद्घाटन होगा। कॉलेज डीन डॉ. एमके सारस्वत और बिल्डिंग प्रभारी डॉ. संजय दीक्षित ने बताया एनोटॉमी, फिजियोलॉजी, फार्मेकोलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी के लिए भी ऐसे ही डिम्ट्रेशन हॉलों का निर्माण जारी है। शीघ्र ही उनका कार्य भी पूरा हो जाएगा।

फर्नीचर के लिए बजट की कमी
दोनों हॉल बनकर तैयार हैं, लेकिन इनमें अभी फर्नीचर उपलब्ध नहीं है। कॉलेज प्रशासन को इसके लिए करीब 10 लाख रुपए की जरूरत है। कॉलेज प्रबंधन ने बताया इस राशि का इंतजाम किया जा रहा है।

होस्टल भी लगभग तैयार
मेडिकल कॉलेज ने 100-100 की क्षमता वाले दो होस्टल भी निर्माणाधीन है। सूत्रों का कहना है कि अगले महीने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हाथों इनका उद्घाटन करवाया जाएगा। 

पत्रिका : १४ अगस्त २०१०

प्रभात झा केस में अब 17 को सुनवाई

भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष जीतू जिराती की रैली के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा कथित रूप से न्यायपालिका पर की गई टिप्पणी पर लगी अवमानना याचिका पर अब 17 अगस्त को सुनवाई होगी। कांग्रेस नेता इंदर प्रजापत द्वारा दायर इस याचिका पर बुधवार को जस्टिस एलएल कोचर और जस्टिस शुभदा वाघमारे की युगलपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील मनोहर दलाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कोर्ट ने कुछ जानकारियां मांगी है, जिन्हें अगली सुनवाई में पेश कर दिया जाएगा। ज्ञात रहे मीडिया में झा का यह बयान प्रकाशित हुआ था कि समाज से कोर्ट चलता है, कोर्ट से समाज नहीं। 
News in Patrika on 13th August 2010

अफसर-दलाल ने मिलकर की फर्जी रजिस्ट्रियां

- जस्टिस झा आयोग के सामने खुली पोल

 
नर्मदा घाटी बने सरदार सरोवर बांध के संबंध में मप्र सरकार द्वारा विस्थापितों को दिए गए पुनर्वास पैकेज में हुए कथित भ्रष्टाचार और फर्जी रजिस्ट्री मामले में अफसरों और दलालों की मिली भगत उजागर हो रही है। न्यायमूर्ति एसएस झा आयोग के समक्ष आयोजित सुनवाई में दो पुनर्वास अफसरों द्वारा गरीब आदिवासियों को ठगे जाने का मामले सामने आए। फर्जीवाड़े के शिकार प्रभावितों ने बयानों और लिखित कथनों में इसकी पुष्टि की। नर्मदा बचाओ आंदोलन की एक जनहित याचिका पर सरदार सरोवर बांध प्रभावितों की फर्जी रजिस्ट्रियों और पुनर्वास स्थलों पर हुए भ्रष्टाचार की जाँच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसएस झा की अध्यक्षता में एक सदस्यी आयोग गठित किया है। आयोग 2 अगस्त से इंदौर में है।

जमीन साढ़े तीन एकड़, भुगतान पांच का
ग्राम कोठड़ा (निसरपुर) के राधेश्याम-पन्नालाल ने आयोग को बताया जब वे जमीन के बारे में पुनर्वास अधिकारी जुवानसिंह बघेल से मिले तो उन्होंने निसरपुर के शकील और अनोखी राठौर दलालों के पास भेज दिया। दलालों ने उनसे 2 लाख रूपए वसूले और फर्जी रजिस्ट्री पकड़ा दी। रजिस्ट्री साढ़े तीन एकड़ की है, लेकिन बघेल ने भुगतान पूरे पांच एकड़ का कर दिया। मलवाड़ी (निसरपुर) के रतनसिंह-रूखडिय़ा ने फर्जीवाड़े में पुनर्वास अधिकारी बघेल के साथ पुनर्वास कार्यालय के बाबू चैतराम पाठक को भी शामिल बताया।

साढ़े पांच लाख के बजाए 40 हजार पकड़ाए
ग्राम खापरखेड़ा (कड़माल) के  मुकेश राधेश्याम ने बताया शकील और अनोखी दलाल उन्हें पुनर्वास कार्यालय कुक्षी में मिले। वहीं पुनर्वास अधिकारी  बघेल और आरके माहेश्वरी से बात कर बताया कि वे जमीन दिलवा देंगे। फर्जी रजिस्ट्री के बाद अफसर ने मुकेश के मुआवजे का चेक भी दलालों को ही दे दिया। दलालों ने मुकेश से 1.35 लाख वसूले। खापरखेड़ा के ही बुदन-सात्या ने बताया शकील और अनोखी दलाल ने उसका मुआवजा पुनर्वास कार्यालय से मिलकर निकाला तथा उन्हें मात्र 40 हजार दिए जबकि प्रति प्रभावित साढ़े पाँच लाख का भुगतान किया जाता है। 

षडयंत्र में पटवारी तक शामिल
ग्राम चिखल्दा के  शफी मोहम्मद पीरबक्ष ने बताया वे दलाल शकील और अनोखी तथा पीपरी (बागली) के पटवारी मेहताबसिंह भार्गव के षडयंत्र के शिकार हुए हैं। दलालों ने उनके दो पुत्रों की फर्जी रजिस्ट्री करवाकर उनसे ढाई लाख लूटे। ग्राम मलवाड़ी (निसरपुर) के राजकुमार गोमा और रतनसिंह रूखडिय़ा तथा निसरपुर के जगदीश औंकार ने दलालों के रूप में नारायण-रतनसिंह (भीलसुर) और खेतिया अमरा (मलवाड़ी) का नाम लिया। धरमराय के दीपक पन्नालाल ने लक्ष्मण दलाल (नवादपुरा) और निसरपुर के रूखडिय़ा-मुरार ने शकील एवं अनोखी का नाम बताया। 

News in Patrika on 13th August 2010