रविवार, 5 सितंबर 2010

प्रधानमंत्री भी नहीं रोक सके 482 करोड़ का भार

- योजना आयोग से जा टकराई पश्चिम मध्यप्रदेश की दो महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाएं
- रेल मंत्री ममता बेनर्जी ने मनमोहनसिंह को बताया दुखड़ा
- समय पर पूरी नहीं होगी इंदौर-दाहोद एवं छोटा उदयपुर-धार रेलवे लाइन



दो महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाएं इंदौर-दाहोद और छोटा उदयपुर-धार की लागत में 482 करोड़ रुपए का बढ़ोतरी हो गई है। प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को उम्मीद थी 1518 करोड़ रुपए के खर्च के साथ आदिवासी इलाकों को विकास की मुख्य धारा में जोडऩे वाली ये दोनों रेल लाइनें वर्ष 2012 तक पूरी हो जाएगी। परंतु हकीकत में ऐसा होना मुमकिन नहीं है। रेल मंत्री ममता बेनर्जी ने प्रधानमंत्री को कह दिया है कि योजना आयोग के असहयोग के कारण हर वर्ष पर्याप्त राशि जारी करना मुमकिन नहीं है और ऐसे में इन्हें तय समय सीमा में पूरा भी नहीं किया जा सकेगा। अब तो इसकी लागत भी 2000 करोड़ हो गई है।

प्रधानमंत्री ने 8 फरवरी, 2008 को झाबुआ में दोनों परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। शुरू से ही इन योजनाओं को पर्याप्त बजट नहीं दिया गया और  काम को गति मंद ही रही। हाल ही में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री कांतिलाल भूरिया ने लेतलाली के संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। इस पर प्रधानमंत्री ने पूछताछ की, तो ममता बेनर्जी ने बताया योजना आयोग से परियोजनाओं के लिए एक बार में ही बड़ी राशि जारी करवाए तभी सामाजिक उत्थान की दृष्टि से अहम इन प्रोजेक्टों को गति दी जा सके।



 रेल लाइनों का काम संतोषप्रद नहीं है। ऐसा क्यों हो रहा है, इस पर ध्यान दें, ताकि परियोजनाओं का कार्य तेजी से चल सके।
- डॉ. मनमोहनसिंह, प्रधानमंत्री (रेल मंत्री ममता बेनर्जी को लिखे पत्र से)

 दोनों प्रोजेक्ट के लिए हर वर्ष 400 करोड़ की जरूरत है, लेकिन योजना आयोग ने देशभर के प्रोजेक्टों के लिए ढाई-तीन हजार करोड़ की ही अनुमति दी है। ऐसे में समय सीमा में कार्य पूरा होना संभव नहीं है।
- ममता बेनर्जी, रेल मंत्री (प्रधानमंत्री को लिखे पत्र से)

दोनों परियोजनाओं की कार्य प्रगति जांचने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में एक विशेष प्रकोष्ठ गठित करवा दिया है। वहां से निगरानी जारी है। इस बार के बजट में दोनों योजनाओं को जो राशि मिली, वह नाकाफी है। 
- कांतिलाल भूरिया, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्र


और भी हैं रेड सिग्नल
  • दोनों योजनाओं के लिए अब तक 25 फीसदी जमीन भी नहीं मिली।
  • लाइनें आदिवासी क्षेत्र से गुजरेंगी। नियमानुसार आदिवासी ही आदिवासी व्यक्ति की जमीन खरीद सकता है। सामान्य व्यक्ति जमीन खरीदता है तो उसे सीईओ जनपद पंचायत से ठहराव प्रस्ताव पास कराना होगा। इसके लिए रेलवे को मोटी रकम चुकाना होगी।
  • छोटा उदयपुर-धार लाइन पहाडिय़ों और खाइयों के बीच से गुजरेगी। बड़े पुल-पुलियाएं बनाना होंगे इसलिए समय और धन बहुत अधिक लगेगा।
  • टुकड़ों-टुकड़ों में करीब 10 किलोमीटर लंबी सुरंगें बनना हैं, इसमें भी लंबा वक्त लग सकता है।
  • आलीराजपुर से धार तक जमीन अधिग्रहण नहीं हो रहा है।  


बजट की बेहद धीमी चाल


इंदौर-दाहोद परियोजना

लंबाई- 205 किमी
प्रमुख स्टेशन- इंदौर, राऊ, पीथमपुर, सागोर, धार, सरदारपुर, अमझेरा, झाबुआ, कतवारा, दाहोद।
पिछले वर्ष तक आवंटन- 40 करोड़
इस वर्ष आवंटन- 75 करोड़
कुल जमीन चाहिए- 950 हेक्टेयर

छोटा उदयपुर-धार परियोजना
लंबाई- 157 किमी 
प्रमुख स्टेशन- छोटा उदयपुर, आलीराजपुर, जोबट और धार। 
पिछले वर्ष तक आवंटन- 20 करोड़
इस वर्ष आवंटन - 50 करोड़ 
जमीन चाहिए- करीब 1100 हेक्टेयर  
 

रेलवे ने नहीं रखा सीसीईए का ध्यान : योजना आयोग
योजना आयोग के ट्रांसपोर्ट डिवीजन के एक अधिकारी ने 'पत्रिकाÓ को बताया वित्त मामलों की केबिनेट कमेटी (सीसीईए) की अनुशंसा के मुताबिक ही आयोग बजट की रूपरेखा तैयार करता है। रेलवे ने इन अनुशंसा का ध्यान रखे बगैर पिछड़े इलाकों के उत्थान के उद्देश्य से देशभर में जरूरत से अधिक प्रोजेक्ट शुरू कर दिए। रेलवे को चाहिए कि वह सीसीईए से इस बारे में बात करे।
 

पत्रिका : ०५ सितम्बर २०१०

हाईकोर्ट बार चुनाव में फार्मों की बिक्री शुरू

मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव के लिए फार्मों की बिक्री शुक्रवार को शुरू हो गई। सचिव पद के लिए  रविंद्रसिंह छाबड़ा, आनंद पाठक, अतुल जायसवाल, पवन जोशी, सहसचिव के लिए रीतेश इनानी, पीयूष श्रीवास्तव, अंशुमन श्रीवास्तव और कार्यकारिणी के लिए सत्यप्रकाश शर्मा, विजय दुबे, हरीश जोशी, जीपी सिंह ने फार्म लिए। यह जानकारी सहायक निर्वाचन अधिकारी मुकेश परवाल ने दी।

पत्रिका : ०४ सितम्बर २०१०

15 वर्ष पहले मृत बुजुर्ग की जमीन नौजवान बनके बेच दी

सरदार सरोवर बांध फर्जी रजिस्ट्री मामला


पंद्रह वर्ष पहले जिस 65 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो चुकी थी, उसकी जमीन एक 25 वर्षीय युवक ने बेच दी। युवक ने खुद को वह बुजुर्ग बताया जिसकी जमीन थी।
दस्तावेजों पर यह बात शुक्रवार को जस्टिस एसएस झा के सामने साबित हुई। जस्टिस झा सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों को दी गई जमीनों में हुई फर्जी रजिस्ट्रियों की जांच करने वाले आयोग के अध्यक्ष हैं। देवास जिले के पोरला गांव के वेरसिंह भाई की मौत करीब 15 वर्ष पहले हो गया था। वर्ष 2006 में उनके नाम से 25 वर्ष के व्यक्ति का फोटो लगाया गया और जमीन बेच दी गई। इसी जमीन पर वेरसिंह का पूरा निर्भर है। ऐसी ही हकीकत प्रेमगढ़ निवासी भंगड़ा पिता सोमला के साथ भी हुई। 
 एमजी रोड स्थित एलआईसी भवन के बाजू में स्थित आयोग के दफ्तर में जस्टिस झा ने देवास जिले के रतनपुर, निमनपुर, पोटला, पुजापुरा जैसे गांव के आदिवासियों, किसानों, बलाई समाज के लोगों की बात सुनी। नर्मदा बचाओ आंदोलन का दावा है कि नर्मदा घाटी के करीब 2000 विस्थापितों की घाटी में फैले दलाल, सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों के गिरोह के जरिए जमीन खरीदी-बेच दी गई। इसमें 300 करोड़ रुपए से अधिक का भ्रष्टाचार हुआ। 

पत्रिका: ०४ सितम्बर २०१०

शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

ड्रग ट्रायल का एक ओर कागज ईओडब्ल्यू पहुंचा

मेडिसिन प्रोफेसर डॉ. अनिल भराणी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष पटेल द्वारा एक ड्रग ट्रायल के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज को स्पांसर कंपनी पहुंचाने का दस्तावेज भी ईओडब्ल्यू पहुंच गया है। वहां इसे जांच में भी लिया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक ईओडब्ल्यू इसे गंभीर आर्थिक अपराध मान रहा है, क्योंकि कॉलेज को कंपनी बताने की जानकारी कॉलेज प्रबंधन को नहीं है। 'पत्रिकाÓ ने ही इसका खुलासा किया है।


एसबीआई सुने चार अफसरों का केस
स्टेट बैंक ऑफ इंदौर के चार अधिकारियों की याचिका का हाईकोर्ट ने निराकरण कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया है कि चूंकि अब इंदौर बैंक का विलय स्टेट ऑफ इंडिया में हो चुका है, इसलिए उनकी बात वहीं सुनी जाना चाहिए। चारों अधिकारियों का इंदौर बैंक ने तबादला कर दिया था। इसे ही चुनौती देने के लिए वे हाईकोर्ट गए थे। सिंगल बैंच ने इसे खारिज कर दिया था और मामला युगलपीठ में लंबित था।



 
पत्रिका : ०३ सितम्बर २०१०

झा आयोग आज से फिर इंदौर में

नर्मदा घाटी में बने सरदार सरोवर बांध के संबंध में मप्र सरकार द्वारा विस्थापितों को दिए गए पुनर्वास पैकेज में हुए कथित भ्रष्टाचार और फर्जी रजिस्ट्री मामले के लिए गठित जस्टिस एसएस झा आयोग शुक्रवार से इंदौर में फिर से सुनवाई शुरू करेगा। एमजीरोड स्थित एलआईसी भवन के बाजू में स्थित आयोग के दफ्तर में जस्टिस झा देवास जिले के पीडि़तों से मिलेंगे। उधर, नर्मदा बचाओ आंदोलन ने जबलपुर में एक अर्जी दाखिल करके मांग की है कि झा आयोग की अंतरिम रिपोर्ट जारी की जाए, ताकि इसके आधार पर नीतिगत फैसले लिए जा सकें।

ज्ञात रहे आंदोलन की याचिका पर ही हाईकोर्ट ने झा आयोग का गठन किया है। आरोप है कि पुनर्वास पैकेज में ढाई हजार से अधिक फर्जी रजिस्ट्रयां की गई और इससे सरकार को 300 करोड़ की चपत लगी। दलालों और अफसरों के गठजोड़ ने विस्थापितों को भूमिहीन कर छोड़ा। मप्र सरकार भी मान चुकी है कि 750 से अधिक रजिस्ट्रियां फर्जी है। हर रजिस्ट्री के लिए सरकार ने साढ़े पांच लाख रुपए का भुगतान किया है।

पत्रिका: ०३ सितम्बर २०१०

हाईकोर्ट में चुनाव लडऩे के पैमाने तय

- अध्यक्ष, सचिव के लिए पांच, तीन वर्ष की सदस्यता अनिवार्य
- हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव



हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में हिस्सेदारी के लिए गुरुवार को नियम-कायदे तय कर दिए गए। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के लिए पांच जबकि सचिव, सहसचिव पद के लिए एसोसिएशन की तीन वर्ष की सदस्यता अनिवार्य रहेगी। कार्यकारिणी के पांच पदों के लिए दो वर्ष की सदस्यता वाले वकील भी दावेदारी कर सकेंगे।

मुख्य चुनाव अधिकारी टीएन सिंह, सहायक चुनाव अधिकारी मुकेश परवाल व सुनील जैन ने बताया मौजूदा संविधान के मुताबिक ही चुनाव होंगे। सोमवार से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सभागृह से नामांकन फार्म मिलेंगे। कीमत 100 रुपए तय की गई है। एसोसिएशन में कुल 1510 सदस्य हैं और इनमें से 1435 को मताधिकार प्राप्त है।

यह है पूरा कार्यक्रम
8 व 9 सितंबर      नामांकन पत्र भरना
9 सितंबर            आपत्ति और उनका निराकरण
10 सितंबर         नामांकन वापसी, प्रत्याशियों की अंतिम सूची
15 सितंबर        दोपहर 3 से 6 मतदान, तत्काल बाद मतगणना व घोषणा।

पत्रिका : ०३ सितम्बर २०१० 

दायर बढ़ा रहा स्वाइन फ्लू

- चार माह में देशभर में 1505 मौतें और मप्र में गई 27 जानें

हवा के जरिए फैलने वाले एच-1 एन-1 वायरस से होने वाले फ्लू (स्वाइन फ्लू) का दायरा पूरे देश में बहुत तेजी से बढ़ रहा है। चार महीने में देश में इससे 1505 लोगों की मौत हो चुकी है। अगस्त से मप्र में भी इसने पांव पसारे और अब तक 27 रोगियों की मृत्यु का कारण बना। मोटे तौर पर रोगियों में से पांच फीसदी की मौत हो रही है। 

चौंकाते आंकड़े
  • मई से 29 अगस्त तक देशभर में स्वाइन फ्लू के 31 हजार 795 मरीज सामने आए। इनमें से 1505 की मौत हो गई।
  • सबसे अधिक 450 मौतें महाराष्टर में हुई। 306 मौतों के कारण गुजरात दूसरे क्रम पर है। राजस्थान में 198 और मप्र में 37  मौतें हुईं।

अब तक मप्र का हाल
जिला           पॉजिटिव   मौत     भर्ती          गंभीर
इंदौर            22            12        22            12
भोपाल         28            09        48            39
जबलपुर       35            05        19            02
उज्जैन         05            00        03            03
ग्वालियर     02            01        03            00
कुल            92            27        95            56


डरने से नहीं सावधानी से चलेगी जिंदगी

डॉक्टरों का कहना है फ्लू का वायरस हवा में है और इससे डरने के बजाए सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बाजार में कुछ टीके आए हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इन्हें लगा पाना संभव नहीं है।

सामान्य सर्दी-खाँसी एवं फ्लू में फक्र
सामान्यत: प्रतिवर्ष ठंड के मौसम में या उसके आसपास फ्लू होता है। सामान्य सर्दी-खाँसी के अलावा फ्लू में बुखार, हाथ-पैरों कमर में दर्द, सिर दर्द, थकावट आदि तेज लक्षण साथ में होते हैं। लक्षणों के आधार पर दोनों में अंतर करना संभव नहीं है, लेकिन स्वाइन फ्लू से पीडि़त व्यक्ति के संपर्क में आने से आशंका बढ़ जाती है।

सूअर (स्वाइन) से नहीं ताल्लुक
वायरस के संक्रमण के शुरुआती दौर से ही यह भ्रम है कि यह वही फ्लू है जो सूअरों में होता है। लेकिन असल में यह नया वायरस है। अत: सूअर के संपर्क में आने से या उसका मांस खाने से यह नहीं फैलता है।

ऐसे फैलता है स्वाइन फ्लू
  1. संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से।
  2. उन वस्तुओं को हाथ लगाने से जिसे संक्रमित व्यक्ति ने छुआ हो। संक्रमित व्यक्ति स्वयं के लक्षण आने के एक दिन पहले से सात दिन बाद तक इसे फैला सकता है।

खुद को बचाने के दस तरीके

  1. जितना संभव हो हाथ साबुन से धोएँ।
  2. यदि साबुन उपलब्ध न हो तो अल्कोहल आधारित क्लिनर से हाथ धोएँ।
  3. संक्रमित व्यक्ति या ऐसा व्यक्ति जिसे स्वाइन फ्लू की आशंका हो, उससे दूरी रखें (कम से कम 6 फुट)।
  4. यदि आपको स्वयं को स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो घर में रहिए।
  5. यदि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना भी पड़ता है, तो फेस मास्क या रेस्पिरेटर पहनें।
  6. स्तनपान कराने वाली माताएँ स्वयं के संक्रमित होने पर ब'चे को दूध न पिलाएँ।
  7. खाँसी या छींक आने पर टिशु पेपर का इस्तेमाल करें एवं उसे तुरंत डस्टबीन में फेंकें।
  8. भीड़ वाली जगह पर न जाएँ।
  9. पानी अधिक मात्रा में पिएँ।
  10. भरपूर नींद लें, इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
 

बाजार में टीके, परंतु गारंटी नहीं
स्वाइन फ्लू से स्वयं को महफूज रखने के लिए बाजार में पांच प्रकार के टीके मौजूद हैं, लेकिन विशेषज्ञ इन्हें किसी की किस्म की गारंटी नहीं मान रहे हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन और मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अशोक वाजपेयी कहते हैं ब'चों, बुजुर्गों, पैरोमेडिकल स्टाफ और कैंसर जैसे गंभीर रोगों के पीडि़तों को टीके लगाए जा सकते हैं। यह अतिरिक्त सावधानी की श्रेणी में रहेगा, लेकिन अभी तक किसी भी टीके के प्रामाणिक परिणाम मौजूद नहीं है। कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय दीक्षित कहते हैं टीके बनाने वाली किसी भी कंपनी ने अपने साहित्य में सफलता का प्रतिशत नहीं लिखा है, जबकि हर टीके में यह अवश्य लिखा जाता है। एक वर्ष पहले आई बीमारी के टीकों की सफलता संदिग्ध ही है, इसलिए इन्हें अंतिम रास्ता नहीं माना जा सकता। उधर, नेसोवेक नाम का नेज़ल स्प्रे वाला टीका बनाने वाले सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मनीष कपूर कहते हैं अध्ययन में हमारे टीके की सफलता प्रमाणित हुई है और केंद्र सरकार की जरूरी अनुमति से ही टीके बनाए जा रहे हैं। टीकों के होलसेलर क्वालिटी ड्रग हाउस संचालक मधुर शर्मा के मुताबिक एक सप्ताह से फोन अटेंड करके परेशान हो गया हूं क्योंकि हर कोई टीके और नेज़ल स्प्रे के बारे में जानना चाहता है। अस्पताल संचालक, लायंस क्लब, स्कूल संचालक समूह में टीका लगाने के लिए खरीदी कर रहे हैं। फिलहाल, मांग पूर्ति से अधिक है।

टीका             कंपनी        यहां बना        एमआरपी             प्रकार   
एग्रीपोल         नोवारटिस    इटली            595 रु (एक डोज)   इंजेक्शन
इन्फ्लूवेक        सोलवेक्स    नीदरलैंड       650 रु (एक डोज)    इंजेक्शन
इन्फ्लूजीया      लूपिन        चीन             650 रु (एक डोज)    इंजेक्शन
फ्लूरिक्स          जीएसई     बेल्जीयम        --      (एक डोज)    इंजेक्शन
नेजोवेक           सिरम         पूणे             790 रु (पांच डोज)     नेजल स्प्रे

पत्रिका : ०३ सितम्बर २०१०